छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ या ‘गुस्सा तिहार’? BJP नेताओं ने ही अफसरशाही पर खोला मोर्चा,

छत्तीसगढ़ में ‘सुशासन तिहार’ या ‘गुस्सा तिहार’? BJP नेताओं ने ही अफसरशाही पर खोला मोर्चा,

रायपुर। छत्तीसगढ़ में इन दिनों सरकार द्वारा “सुशासन तिहार” मनाया जा रहा है। प्रदेशभर में शिविर लगाकर लोगों की शिकायतें सुनी जा रही हैं और योजनाओं का लाभ पहुंचाने के दावे किए जा रहे हैं। लेकिन अब यही मंच सरकार और अफसरशाही के बीच टकराव का कारण बनता दिखाई दे रहा है। खास बात यह है कि प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी बीजेपी के जनप्रतिनिधि ही उठा रहे हैं। 1 मई से शुरू हुए इस अभियान के तहत मुख्यमंत्री अलग-अलग जिलों में पहुंचकर जमीनी हकीकत जानने में जुटे हैं। इसी दौरान कई जगहों पर जनप्रतिनिधियों का गुस्सा अधिकारियों पर खुलकर सामने आया। गरियाबंद और बलरामपुर जिले के शिविरों में माहौल उस वक्त गरमा गया, जब नेताओं ने मंच से ही अफसरों की कार्यशैली पर तीखे बयान दिए।

राजिम विधायक रोहित साहू ने भ्रष्टाचार पर नाराजगी जताते हुए कहा कि भ्रष्ट पटवारी को “जूता मारूंगा”। उनके इस बयान के बाद मंच पर मौजूद अधिकारियों के चेहरे उतर गए। वहीं अमलीपारा शिविर में पूर्व संसदीय सचिव Govardhan Manjhi ने अधिकारियों पर फोन तक नहीं उठाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जब जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं हो रही, तो आम जनता की समस्याओं का समाधान कैसे होगा।

इसी कड़ी में प्रतापपुर विधायक Shakuntala Singh Porte ने भी अधिकारियों को जमकर खरी-खोटी सुनाई। उन्होंने कहा कि जनता परेशान होकर शिविरों में आती है और काम नहीं होने पर ‘श्राप’ देकर लौटती है। विधायक ने अफसरों को यह भी याद दिलाया कि “पढ़-लिख लेने से कोई जनता से ऊपर नहीं हो जाता।” राजनीतिक गलियारों में अब यह चर्चा तेज हो गई है कि जब सत्ता पक्ष के नेता ही मंच से अफसरशाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ खुलकर बोल रहे हैं, तो प्रदेश में प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविक स्थिति क्या होगी। सुशासन तिहार के जरिए सरकार जनता तक पहुंचने का दावा कर रही है, लेकिन जनप्रतिनिधियों के तीखे बयानों ने सिस्टम की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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