रायपुर। छत्तीसगढ़ में गोवंश तस्करी के मामलों पर सरकार ने अब सख्त रुख अपना लिया है। बीते साढ़े तीन वर्षों में राज्य में गो तस्करी के 785 प्रकरण दर्ज किए गए, जिनमें 544 वाहनों को जब्त किया गया है। हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े पैमाने पर जब्ती के बावजूद एक भी वाहन की अब तक नीलामी नहीं की गई है। इस स्थिति पर गहरी नाराज़गी जताते हुए राज्य के गृहमंत्री विजय शर्मा ने संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई और त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए हैं।
गृहमंत्री शर्मा ने गुरुवार को मंत्रालय में एक उच्चस्तरीय बैठक लेकर सभी जिलों के नोडल अधिकारियों से गो तस्करी रोकने के प्रयासों की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोवंश तस्करी कोई सामान्य अपराध नहीं, बल्कि एक संगठित आपराधिक गतिविधि है, जिसे केवल कड़ी और सुनियोजित कार्रवाई से ही रोका जा सकता है।
वाहनों की नीलामी में देरी पर सख्त सवाल
शर्मा ने अधिकारियों से यह जानना चाहा कि अब तक कितने वाहन राजसात किए गए, कितनों की नीलामी हुई और कहां-कहां उचित प्रक्रिया नहीं अपनाई गई। उन्होंने विशेष रूप से कलेक्टर स्तर पर प्रक्रियात्मक ढिलाई को चिन्हित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगे की बैठकों में प्रत्येक जिले को नीलामी, राजसात, दर्ज प्रकरणों और SAFEMA एवं रासुका जैसी धाराओं के तहत हुई कार्रवाई का पूरा ब्यौरा प्रस्तुत करना होगा।
‘ऑपरेशन शंखनाद’ की बड़ी सफलता: 900 गोवंशों की तस्करी रोकी गई
इधर, जशपुर पुलिस द्वारा एसएसपी शशि मोहन सिंह के नेतृत्व में चलाए जा रहे ‘ऑपरेशन शंखनाद’ के तहत अब तक 900 से अधिक गोवंशों को तस्करी से बचाया गया है। इस विशेष अभियान में 123 तस्करों को गिरफ्तार किया गया और 46 वाहनों को जब्त किया गया है। गो-तस्करी की सूचना मिलने पर पुलिस तड़के ही गांवों में घेराबंदी कर रही है, जिससे लगातार सफलता मिल रही है।
गोसेवकों को पहचानने और सहयोग को बढ़ावा देने के निर्देश
गृहमंत्री ने यह भी कहा कि गोसेवा और एनसीसी से जुड़े युवाओं को चिह्नांकित कर उनके लिए पहचान-पत्र जारी किए जाएं। उन्होंने पुलिस और गोसेवकों के बीच समन्वय बढ़ाने, गोसेवकों से मिली सूचना को गंभीरता से लेने और टेक्नोलॉजी की मदद से सतर्क तंत्र विकसित करने पर ज़ोर दिया। साथ ही उन्होंने गोसेवकों का मनोबल बढ़ाने और उनके कार्य को सम्मान देने के निर्देश भी दिए।