महान कुलेश्वर धाम: आस्था, इतिहास और परंपरा का संगम,कुम्हली स्थित प्राचीन शिवधाम में महाशिवरात्रि पर उमड़ती है श्रद्धालुओं की भीड़

जामगांव (आर)। दुर्ग जिला मुख्यालय से लगभग 35 किलोमीटर दूर धमतरी मार्ग पर स्थित ग्राम कुम्हली का पावन कुलेश्वर महादेव मंदिर क्षेत्र में श्रद्धा और आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। ऐतिहासिक मान्यताओं के अनुसार इस धाम का इतिहास लगभग 1500 से 1700 ईस्वी के मध्य का माना जाता है, जो इसकी प्राचीनता और गौरवशाली विरासत को दर्शाता है। किंवदंतियों के अनुसार प्राचीन काल में यहां शिवलिंग की स्थापना की गई थी। बताया जाता है कि मंदिर परिसर के समीप खुदाई के दौरान शिवलिंग प्राप्त हुआ, जिसके पश्चात यहां विधिवत मंदिर निर्माण कराया गया। प्राकृतिक स्वरूप में विराजमान यह शिवलिंग आज भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है।

ग्रामीणों के अनुसार वर्ष 1930 के आसपास यहां नियमित पूजा-अर्चना प्रारंभ हुई। समय के साथ ग्रामीणों और मंदिर समिति के सहयोग से मंदिर का विस्तार और सौंदर्यीकरण किया गया। वर्तमान में मुख्य शिवलिंग के अतिरिक्त तीन अन्य शिवलिंग भी स्थापित हैं, जहां प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा की जाती है।प्रत्येक वर्ष महाशिवरात्रि के अवसर पर कुलेश्वर महादेव का विशेष श्रृंगार किया जाता है। इस दौरान दूर-दूर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं और मंदिर परिसर में मेले जैसा वातावरण बन जाता है। मंदिर समिति एवं ग्रामीणों द्वारा भोग-भंडारे का आयोजन भी किया जाता है, जिसमें श्रद्धालु श्रद्धापूर्वक प्रसाद ग्रहण करते हैं। धार्मिक आस्था के साथ-साथ यह धाम क्षेत्र की सांस्कृतिक परंपरा, सामाजिक एकता और सामूहिक श्रद्धा का भी प्रतीक बन चुका है।

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