रायपुर, 22 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के वन क्षेत्रों में ‘हरा सोना’ कहे जाने वाले तेंदूपत्ता से जुड़े लाखों परिवारों के लिए इस वर्ष बड़ी राहत और खुशखबरी सामने आई है। राज्य सरकार की नई नीतियों और प्रयासों के चलते लगभग 13 लाख आदिवासी और वनवासी परिवारों को करीब 920 करोड़ रुपये का भुगतान किया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार होने की उम्मीद है।
सरकार द्वारा तेंदूपत्ता संग्रहण दर में की गई बढ़ोतरी इस बदलाव का सबसे बड़ा आधार है। वर्ष 2024 से प्रति मानक बोरा की दर 4 हजार रुपये से बढ़ाकर 5 हजार 500 रुपये कर दी गई है, जिससे संग्राहकों की आय में सीधा इजाफा होगा। प्रदेश में वर्ष 2026 के लिए 31 जिला वनोपज सहकारी यूनियनों के तहत 902 प्राथमिक समितियों में संग्रहण कार्य प्रस्तावित है। इस वर्ष करीब 15 लाख मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें से लगभग 11 लाख मानक बोरा संग्रहण होने का अनुमान है।
बस्तर संभाग में इस कार्य को विशेष प्राथमिकता दी गई है। यहां 10 जिला यूनियनों की 216 समितियों में करीब 4 लाख मानक बोरा संग्रहण का लक्ष्य तय किया गया है। साथ ही इस वर्ष 14 हजार से अधिक नए परिवार भी इस कार्य से जुड़े हैं, जिससे रोजगार के अवसर बढ़े हैं। नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में भी इस बार संग्रहण कार्य को सुचारू रूप से संचालित करने की तैयारी की गई है। नारायणपुर के अबूझमाड़ क्षेत्र में पहली बार 10 नए फड़ खोले गए हैं, जबकि सुकमा और केशकाल क्षेत्रों में भी विस्तार किया गया है।
सरकार ने संग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी और आसान बनाने के लिए डिजिटल भुगतान प्रणाली लागू की है। अब संग्राहकों को सीधे उनके बैंक खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान किया जाएगा। इसके अलावा संग्राहक कार्ड, बोरा, सुतली, भंडारण और परिवहन जैसी सभी सुविधाएं भी सुनिश्चित की गई हैं।