रायपुर। छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) के हज़ारों संविदा कर्मचारी इन दिनों अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। उनकी माँग है कि भाजपा के चुनावी घोषणा पत्र “मोदी गारंटी” में शामिल नियमितीकरण के वादे को तत्काल लागू किया जाए।
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएँ बुरी तरह प्रभावित हो गई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों से लेकर जिला अस्पतालों तक मरीजों को इलाज में दिक़्क़तें झेलनी पड़ रही हैं, क्योंकि राज्य के 90% से अधिक उप-स्वास्थ्य केंद्र कर्मचारी और 60–70% जिला अस्पताल कर्मचारी संविदा पर कार्यरत हैं।
कर्मचारी संगठनों का आरोप
NHM कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ अमित कुमार मिरी,संरक्षक,हेमंत सिन्हा,महासचिव कौशलेश तिवारी संगठन प्रमुख रविशंकर दीक्षित एवं प्रदेश प्रवक्ता पुरन दास का कहना है कि भाजपा ने चुनाव जीतने से पहले घोषणा पत्र में और प्रधानमंत्री मोदी ने “मोदी गारंटी” में संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण का वादा किया था, लेकिन अब तक उस पर अमल नहीं हुआ।
कर्मचारी प्रतिनिधियों ने कहा—
“हमने कोविड-19 महामारी में जान की परवाह किए बिना सेवाएँ दीं। सरकार ने हमें स्थायी दर्जा देने का वादा किया था। अब समय आ गया है कि यह वादा पूरा किया जाए। जब तक हमारी माँगें नहीं मानी जातीं, हड़ताल जारी रहेगी।”
भाजपा सरकार का पक्ष
राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ने हड़ताल को अनुचित बताते हुए कर्मचारियों से काम पर लौटने की अपील की। उन्होंने कहा—“भाजपा सरकार कर्मचारियों के हितों के लिए प्रतिबद्ध है। नियमितीकरण जैसे संवेदनशील मुद्दे पर विचार चल रहा है, लेकिन स्वास्थ्य सेवाओं को बाधित करना जनता के हित में नहीं है।”
विपक्ष का हमला
कांग्रेस ने इस मुद्दे पर भाजपा सरकार को घेरा है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा—“भाजपा ने सत्ता पाने के लिए ‘मोदी गारंटी’ का झुनझुना दिखाया। चुनाव जीतने के बाद अब कर्मचारी सड़क पर हैं और जनता इलाज के लिए भटक रही है। यह सरकार की वादाखिलाफी का जीता-जागता उदाहरण है।”
जनता और विशेषज्ञों की राय
हड़ताल से सबसे अधिक प्रभावित ग्रामीण इलाकों के लोग हैं। कई जगह स्वास्थ्य केंद्रों में ताले लटके हैं और मरीजों को निजी अस्पतालों का रुख करना पड़ रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि छत्तीसगढ़ की स्थिति “अमीर धरती, गरीब कर्मचारी” की विडंबना को उजागर करती है। खनिज और ऊर्जा से समृद्ध प्रदेश में कर्मचारी 10–12 हज़ार की तनख्वाह और बिना सामाजिक सुरक्षा के काम करने को मजबूर हैं।
निष्कर्ष
NHM संविदा कर्मचारियों का आंदोलन अब सरकार की साख और जनता की सहूलियत दोनों पर सवाल खड़ा कर रहा है। एक ओर सरकार का कहना है कि समाधान की दिशा में काम हो रहा है, वहीं कर्मचारी “मोदी गारंटी” और घोषणा पत्र के वादों पर अमल की माँग पर अड़े हैं। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इस टकराव को किस तरह सुलझाती है और क्या संविदा से स्थायित्व की राह आखिरकार खुल पाएगी।