YC न्यूज़ डेस्क — भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे तनाव के बाद शनिवार शाम 5 बजे से जमीन, आकाश और समुद्र में पूर्ण युद्धविराम लागू हो गया है। यह निर्णय दोनों देशों की आपसी सहमति और अमेरिकी मध्यस्थता के बाद आया है। भारत के उपराष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार विक्रम मिसरी ने पुष्टि की है कि दोनों देश युद्धविराम के लिए राजी हो गए हैं। इस समझौते को औपचारिक रूप से आगे बढ़ाने के लिए 12 मई को दोपहर 12 बजे दोनों देशों के डीजीएमओ (DGMO) स्तर की बातचीत भी तय की गई है।
सीजफायर के इस समझौते में निर्णायक भूमिका अमेरिका ने निभाई। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार शाम 5:30 बजे ट्वीट कर बताया, “रात यूएसए की मध्यस्थता में चली लंबी बातचीत के बाद मुझे बताते हुए खुशी हो रही है कि भारत और पाकिस्तान तुरंत और पूरी तरह हमले रोकने के लिए तैयार हो गए हैं। मैं दोनों देशों को कॉमनसेंस, समझदारी से भरा फैसला लेने के लिए बधाई देता हूं।”
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भी इस पहल में अमेरिका की भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और वे स्वयं पिछले 48 घंटों से भारत-पाकिस्तान के वरिष्ठ अधिकारियों, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पीएम शहबाज शरीफ, विदेश मंत्री एस. जयशंकर, रक्षा प्रमुख आसिम मुनीर और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल से संपर्क में थे।
रूबियो ने कहा, “मुझे यह बताते हुए खुशी हो रही है कि पाकिस्तान और भारत की सरकार तुरंत युद्धविराम के लिए राजी हो गई हैं। दोनों देश निष्पक्ष मंच पर विवादों का निपटारा करने के लिए बातचीत को तैयार हो गए हैं। हम मोदी और शहबाज शरीफ की तारीफ करते हैं कि उन्होंने बुद्धिमत्ता से शांति का रास्ता चुना।”
यह सीजफायर समझौता न सिर्फ दक्षिण एशिया के लिए, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक सफलता मानी जा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस पहल पर दोनों देश गंभीरता से आगे बढ़ते हैं, तो यह उपमहाद्वीप में स्थायी शांति की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो सकता है।