पाटन । छत्तीसगढ़ की समृद्ध वन संपदा को विज्ञान और आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए जामगांव (एम) में केन्द्रीय आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई, हर्बल एक्सटेंशन यूनिट, वेयरहाउस और कामना फैसिलिटी का भव्य लोकार्पण मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की गरिमामयी उपस्थिति में हुआ । कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्यमंत्री श्री साय ने हितग्राहियों को चरण पादुका पहनाकर किया। इस अवसर पर श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर कैलाशानंद महाराज, वन, जलवायु एवं कौशल विकास मंत्री केदार कश्यप, दुर्ग सांसद विजय बघेल, विधायकगण गजेन्द्र यादव, ललित चंद्राकर, रीकेश सेन, डोमन लाल कोर्सेवाडा, पूर्व मंत्री रमशीला साहू एवं भाजपा जिलाध्यक्ष सुरेन्द्र कौशिक सहित क्षेत्रीय जनप्रतिनिधि और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
मौके पर आयोजित समारोह में सीएम साय ने कहा यह आयुर्वेदिक प्रसंस्करण इकाई प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत के विजन को धरातल पर उतारते हुए छत्तीसगढ़ को वैश्विक स्तर पर हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में पहचान दिलाने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। यह इकाई फॉरेस्ट टू फार्मेसी मॉडल को साकार करती है, जिसके अंतर्गत महुआ, साल बीज, गिलोय, अश्वगंधा, कालमेघ जैसे औषधीय वनोपजों का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण कर चूर्ण, सिरप, टैबलेट, तेल एवं अवलेह जैसे गुणवत्तापूर्ण आयुर्वेदिक उत्पाद तैयार किए जाएंगे।
मुख्यमंत्री ने लोगों से ‘एक पेड़ माँ के नाम’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक व्यक्ति को अपनी माँ के नाम पर कम से कम एक पेड़ अवश्य लगाना चाहिए और उसका संरक्षण करना चाहिए। इससे पर्यावरण संरक्षण के साथ ही माँ के प्रति सम्मान भाव भी बना रहेगा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि छत्तीसगढ़ में 44.10 प्रतिशत वनाच्छादित क्षेत्र है, जिससे वनोपज की बहुलता है। यह प्रसंस्करण इकाई मध्य भारत की सबसे बड़ी इकाई है। इसके प्रारंभ से वनोपज का संग्रहण, प्रसंस्करण और विपणन सुगम होगा। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ का वनोपज अब वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बनाएगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 67 प्रकार की वनोपज का संग्रहण किया जाता है, जिससे 13 लाख 40 हजार वनवासियों को सीधा लाभ मिलेगा। श्री कश्यप ने कहा कि ‘मोदी की गारंटी’ के अनुरूप ‘चरण पादुका योजना’ को पुनः प्रारंभ किया गया है।
महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 स्वामी कैलाशनंद गिरी जी महाराज ने भी कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आयुर्वेदिक औषधियों की महत्ता पर प्रकाश डाला।
मुख्यमंत्री श्री साय ने लोकार्पण से पूर्व प्रसंस्करण इकाई परिसर में आंवला का पौधा रोपित किया। इसके साथ ही वन मंत्री श्री कश्यप ने सीताफल का पौधा, सांसद श्री विजय बघेल ने बेल तथा महामंडलेश्वर श्री श्री 1008 डॉ. स्वामी कैलाशानंद गिरी जी महाराज ने भी सीताफल का पौधा रोपित किया।
उल्लखनीय है कि ₹36.47 करोड़ की लागत से बनी यह इकाई 27.87 एकड़ क्षेत्र में स्थापित है, जिससे हर वर्ष ₹50 करोड़ मूल्य के उत्पादों के निर्माण की संभावना है। साथ ही, 20,000 मीट्रिक टन क्षमता वाला आधुनिक वेयरहाउस भी इसमें निर्मित किया गया है, जिससे सीजनल वनोपजों का दीर्घकालिक भंडारण संभव हो सकेगा।
यह परियोजना न केवल 1000 से अधिक लोगों को प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार प्रदान करेगी, बल्कि महिलाओं को प्राथमिक प्रसंस्करण कार्यों में भागीदारी और युवाओं को तकनीकी प्रशिक्षण के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाएगी।