कर्रेगुट्टा पर तिरंगा फहराना मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक: विजय शर्मा

कर्रेगुट्टा पर तिरंगा फहराना मेरे जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक: विजय शर्मा

YC न्यूज डेस्क | रायपुर। बस्तर के कभी नक्सल प्रभावित रहे इलाकों में इस बार स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराने को लेकर खास उत्साह है। इसी संदेश के साथ गृह मंत्री विजय शर्मा ने बस्तर में तीन दिवसीय तिरंगा यात्रा निकाली। यात्रा के दौरान वे ताड़मेटला, बुर्कापाल और चिंतागुफा जैसे उन इलाकों से गुजरे, जहां अतीत में बड़ी नक्सली घटनाएं हो चुकी हैं। करीब 600 किलोमीटर की बाइक यात्रा के दौरान शुक्रवार शाम गृह मंत्री कर्रेगुट्टा पहाड़ी पहुंचे और वहां तिरंगा फहराया। उन्होंने इसे अपने जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक बताया।

लैंडमाइंस का डर था, लेकिन तय रास्ते से नहीं हटे

यात्रा के दौरान लैंडमाइंस के खतरे को लेकर विजय शर्मा ने कहा कि पहाड़ी और आसपास के इलाकों में अभी भी लैंडमाइंस बरामद हो रही हैं और उनकी तलाश जारी है। इसलिए खतरे की आशंका बनी हुई थी। उन्होंने बताया कि यात्रा से पहले यह तय किया गया था कि कोई भी व्यक्ति सड़क से नीचे नहीं उतरेगा और बाइक केवल निर्धारित स्थानों पर ही रोकी जाएगी। गृह मंत्री ने कहा कि इस यात्रा के जरिए दुनिया को यह संदेश देने की कोशिश की गई कि नक्सलवाद कमजोर पड़ चुका है और जनता की जीत हुई है।

डर का माहौल खत्म करना था उद्देश्य

विजय शर्मा ने कहा कि नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में लंबे समय तक लोगों को स्वतंत्रता दिवस मनाने की आजादी नहीं थी। ग्रामीणों के मन में भय का माहौल था। उन्होंने कहा कि यात्रा के मार्ग की जानकारी छह दिन पहले ही सार्वजनिक कर दी गई थी और तय किए गए सभी रास्तों से होकर यात्रा निकाली गई। इसका मुख्य उद्देश्य लोगों के मन से नक्सलवाद का डर खत्म करना था।

आत्मसमर्पण कर चुके नक्सली भी फहराएंगे तिरंगा

गृह मंत्री ने कहा कि जिन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है, वे अब संविधान की मुख्यधारा में शामिल हो चुके हैं। आत्मसमर्पण के समय उन्होंने हाथों में संविधान उठाया था। ऐसे में तिरंगे और संविधान के प्रति सम्मान स्वाभाविक है। उन्होंने बताया कि आत्मसमर्पण केंद्रों में भी स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगा फहराया जाएगा और वहां मौजूद लोग सामूहिक रूप से राष्ट्रगान गाएंगे।

कर्रेगुट्टा पर तिरंगा फहराना सबसे सुखद अनुभव

विजय शर्मा ने कर्रेगुट्टा पहाड़ी पर तिरंगा फहराने के अनुभव को यात्रा का सबसे सुखद और भावुक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि यह उनके जीवन के सबसे महत्वपूर्ण क्षणों में से एक रहा। उनके मुताबिक, यात्रा में करीब 400 बाइक शामिल हुईं, जबकि लगभग 50 बाइक कर्रेगुट्टा की चोटी तक पहुंचीं। चिंतागुफा क्षेत्र का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि यहां देश में सबसे अधिक जवानों के शहीद होने से जुड़े दर्द को महसूस किया जा सकता है। वहां पहुंचने पर लोगों की आंखों में खुशी के आंसू दिखाई दिए।

छत्तीसगढ़ को मिले 272 में से 141 गैलेंट्री अवॉर्ड

गृह मंत्री ने कहा कि देशभर में दिए गए 272 गैलेंट्री अवॉर्ड में से 141 छत्तीसगढ़ के जवानों को मिले हैं। उन्होंने इसे प्रदेश के लिए गर्व की बात बताया और कहा कि सुरक्षा बलों के बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

शहीदों के घरों की मिट्टी से बनेगी स्मृतियों की पहचान

तिरंगा यात्रा के दौरान शहीद जवानों के घरों से मिट्टी एकत्र करने की पहल भी की गई। विजय शर्मा ने बताया कि जिन स्थानों पर वे पहुंचे, वहां लोगों ने शहीदों के घरों की मिट्टी उन्हें दी। इसे अलग-अलग जिलों के पुलिस अधीक्षकों के पास सुरक्षित रखा गया है। उन्होंने बताया कि भविष्य में शहीद स्मारक बनाए जाने पर इस मिट्टी का इस्तेमाल किया जाएगा। स्मारक में अलग-अलग सुरक्षा बलों के योगदान और बलिदान को प्रदर्शित करने के लिए अलग गैलरी बनाने की योजना है।

‘तिरंगा किसी पार्टी का नहीं, भारत माता का है’

कांग्रेस नेताओं के यात्रा में शामिल नहीं होने के सवाल पर विजय शर्मा ने कहा कि तिरंगा किसी राजनीतिक दल का नहीं, बल्कि पूरे देश का है। उन्होंने कहा कि देश से प्रेम करने वाला हर व्यक्ति इस यात्रा का हिस्सा बन सकता है। उन्होंने दावा किया कि यात्रा के दौरान गांवों में लोगों ने भारत माता की जय के नारे लगाए और खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने भी यात्रा का स्वागत किया।

काले झंडे के बजाय काला छाता लगाने की कहानी

विजय शर्मा ने बताया कि बस्तर के कुछ गांवों में ग्रामीणों ने नक्सलियों के डर की कई पुरानी घटनाएं साझा कीं। उन्होंने कांकेर के किस्कोड़ा गांव का उदाहरण देते हुए कहा कि ग्रामीणों के मुताबिक नक्सली उन्हें तिरंगा फहराने से रोकते थे और काला झंडा लगाने का दबाव बनाते थे। डर के कारण कुछ ग्रामीण घरों की छतों पर काला छाता रख देते थे, ताकि दूर से नक्सलियों को लगे कि काला झंडा लगाया गया है। गृह मंत्री ने कहा कि ऐसी कहानियां बताती हैं कि नक्सलवाद के कारण लोगों ने लंबे समय तक किस तरह भय में जीवन बिताया। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य इसी भय को खत्म कर बस्तर में लोकतंत्र, राष्ट्रभावना और विकास का विश्वास मजबूत करना है।

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