रायपुर। राज्य में वोकेशनल शिक्षा को बढ़ावा देने के नाम पर सरकार ने 652 स्कूलों में 40 करोड़ रुपए के उपकरण तो भेज दिए, लेकिन इनका उपयोग सिखाने के लिए आवश्यक प्रशिक्षकों की नियुक्ति ही नहीं हो सकी। इस गंभीर लापरवाही के कारण करोड़ों के उपकरण सिर्फ शो-पीस बनकर रह गए हैं, जिनका कोई ठोस उपयोग नहीं हो पा रहा है।
व्यावसायिक शिक्षा के नाम पर दिखावा:
स्कूलों में वोकेशनल कोर्स की शुरुआत इसलिए की गई थी ताकि छात्र-छात्राएं पढ़ाई के साथ-साथ व्यावसायिक प्रशिक्षण भी प्राप्त कर सकें और आगे चलकर रोजगार के बेहतर अवसर पा सकें। इसके लिए 10 ट्रेड चुने गए और उनके उपकरण अलग-अलग स्कूलों में भेजे गए। लेकिन, प्रशिक्षकों की नियुक्ति न होने के कारण यह योजना कागज़ों तक ही सीमित रह गई।
मीडिया रिपोर्ट्स में खुलासा:
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 652 स्कूलों में भेजे गए उपकरणों का न तो उपयोग हो रहा है, न ही बच्चों को प्रशिक्षण मिल पा रहा है। सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बिना शिक्षक के कई स्कूलों में परीक्षाएं तक करवा दी गईं।
फाइलों में नियुक्ति, ज़मीनी स्तर पर शून्य:
राज्य सरकार द्वारा 1315 व्यावसायिक प्रशिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया लंबे समय से अटकी हुई है। शिक्षा विभाग की लापरवाही और लेटलतीफी के चलते इन नियुक्तियों पर अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। वहीं, उपकरणों की आपूर्ति में विभाग ने तेजी दिखाई और 40 करोड़ के उपकरण अलग-अलग ट्रेड्स के अनुसार स्कूलों में भिजवा दिए।
उपकरणों की स्थिति और उपयोग:
‘ऑटोमोटिव ट्रेड’, ‘आईटी’, ‘ब्यूटी एंड वेलनेस’ जैसे ट्रेड के उपकरण स्कूलों के कमरों और गोदामों में धूल खा रहे हैं। कहीं इन बक्सों को खोला तक नहीं गया है। प्रशिक्षक नहीं होने के कारण शिक्षक भी इनका उपयोग करवाने से बचते हैं, जिससे बच्चों को इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल पा रहा।
बिना सिखाए दे दी परीक्षा:
इतनी बड़ी विडंबना तब सामने आई जब छात्रों से ट्रेड की परीक्षा भी ले ली गई, जबकि उन्हें कोई प्रशिक्षण दिया ही नहीं गया था। ऐसे में प्रमाण पत्र का कोई वास्तविक मूल्य नहीं रह गया है।
जनता का पैसा बर्बाद:
शिक्षा विभाग की इस लापरवाही से ना केवल छात्रों का भविष्य अंधकारमय हुआ है, बल्कि जनता के टैक्स का पैसा भी बर्बाद हो रहा है। यदि जल्द ही प्रशिक्षकों की नियुक्ति नहीं की गई तो करोड़ों का यह निवेश पूरी तरह व्यर्थ चला जाएगा।
प्रशासन से जवाबदेही की मांग:
शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने सरकार से इस पूरे मामले की जांच करवाकर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, प्रशिक्षकों की त्वरित नियुक्ति कर विद्यार्थियों को सही प्रशिक्षण देने की व्यवस्था की जाए ताकि उनका भविष्य संवर सके।