रायपुर/बालोद | प्रदेश में जल प्रबंधन की बड़ी खामी सामने आई है, जहां कच्ची नहरों के कारण हर साल करीब 1350 करोड़ लीटर पानी बर्बाद हो रहा है। बालोद सहित कई जिलों के लिए जीवनरेखा माने जाने वाले तांदुला बांध, गोंदली बांध और खरखरा बांध से छोड़ा गया पानी नहरों की खराब स्थिति के कारण अपने गंतव्य तक पहुंचने से पहले ही बहकर नष्ट हो जाता है। जानकारी के मुताबिक, लगभग 60 किलोमीटर लंबी नहर की अब तक लाइनिंग नहीं हो सकी है। कच्ची नहरों के कारण 20 से 30 प्रतिशत तक पानी रास्ते में ही रिसकर या बहकर खेतों, सड़कों और अन्य स्थानों में फैल जाता है। वहीं जिन नहरों की लाइनिंग हो चुकी है, वहां से भी 5 से 7 प्रतिशत पानी का नुकसान हो रहा है। हर साल गर्मी के मौसम में इन बांधों से निस्तारी तालाबों को भरने के लिए पानी छोड़ा जाता है, लेकिन कच्ची नहरों के चलते यह पानी लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही बर्बाद हो जाता है। सेवानिवृत्त इंजीनियरों और विभागीय अधिकारियों के अनुसार, तीनों बांधों से कुल मिलाकर लगभग 13.5 एमसीएम (करीब 1350 करोड़ लीटर) पानी व्यर्थ बह जाता है।
ऐसे हो रहा नुकसान का गणित
- तांदुला बांध से छोड़े गए पानी में करीब 9 एमसीएम पानी व्यर्थ बह जाता है।
- गोंदली बांध से लगभग 2.5 एमसीएम पानी बर्बाद होता है।
- खरखरा बांध से करीब 2 एमसीएम पानी रास्ते में ही नष्ट हो जाता है।
जिम्मेदारी पर विभाग का तर्क
सिंचाई विभाग के ईई पीयूष देवांगन और एसडीओ एचएल साहू के अनुसार नहर से तालाबों तक पानी पहुंचाने की जिम्मेदारी ग्राम पंचायतों की होती है। उन्होंने बताया कि मुख्य नहरों की लाइनिंग का काम काफी हद तक पूरा हो चुका है, जबकि कुछ माइनर नहरों की लाइनिंग बाकी है। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजे गए हैं और स्वीकृति मिलने के बाद कार्य कराया जाएगा।
हर साल दोहराई जा रही समस्या
स्थानीय स्तर पर यह समस्या हर वर्ष देखने को मिलती है, लेकिन इसके समाधान के लिए ठोस कदम अब तक नहीं उठाए गए हैं। जल संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर लापरवाही के चलते लाखों लोगों की जरूरत का पानी व्यर्थ बह रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नहरों की समय पर पक्की लाइनिंग और रखरखाव किया जाए, तो इस बड़े नुकसान को रोका जा सकता है और पानी का बेहतर उपयोग सुनिश्चित किया जा सकता है।