दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग रेलवे स्टेशन में शुक्रवार को मानव तस्करी और धर्मांतरण के आरोपों को लेकर जबरदस्त हंगामा हुआ। बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने दो मिशनरी सिस्टर (नन) और एक युवक को तीन आदिवासी युवतियों को आगरा ले जाकर बेचने और धर्मांतरण कराने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए घेर लिया। घटना दुर्ग जीआरपी चौकी (भिलाई थाना-3) की है, जहां से तीनों को हिरासत में लिया गया है और पूछताछ जारी है। वहीं, तीनों युवतियों को भिलाई सखी सेंटर में सुरक्षित रखा गया है।
बजरंग दल ने ऐसे पकड़ा मामला
प्राप्त जानकारी के अनुसार, नारायणपुर जिले की ओरछा क्षेत्र की तीन आदिवासी युवतियां – कमलेश्वरी, ललिता और सुखमति को लेकर एक युवक और दो नन रायपुर से ट्रेन में आगरा ले जा रहे थे। सुबह 8:30 बजे के करीब दुर्ग रेलवे स्टेशन पर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं की नजर एक लड़की पर पड़ी जो रो रही थी। युवक उसे यह कहते सुना गया – “अब इतनी दूर आ चुकी हो, वापस नहीं जा सकती।” इस पर संदेह होने पर कार्यकर्ताओं ने पूछताछ शुरू की और मामला बढ़ता चला गया। तीनों युवतियों ने जानकारी दी कि उन्हें नौकरी का झांसा देकर लाया गया था।
मिली संदिग्ध सामग्री
हिरासत में लिए गए युवक और मिशनरी सिस्टर के पास से तीन आधार कार्ड, एक डायरी, पादरियों के नंबर, और 7-8 लड़कियों की तस्वीरें बरामद हुई हैं।
बजरंग दल की प्रदेश संयोजिका ज्योति शर्मा ने दावा किया है कि, यह महज नौकरी का बहाना नहीं, बल्कि सुनियोजित मानव तस्करी और धर्मांतरण का मामला है।।उन्होंने यह भी कहा कि “डायरी में कई राज्यों के नाम दर्ज हैं और यह आशंका है कि इस गिरोह के जाल में कई लड़कियां पहले भी फंसी हैं।
परिजनों की आपबीती-
कमलेश्वरी की बहन के पति अवस लाल धनेलिया ने बताया कि उन्होंने पहले ही घर में कहा था कि किसी पर भरोसा कर बाहर भेजना ठीक नहीं, लेकिन बात नहीं मानी गई।नारायणपुर के ओरछा थाना प्रभारी रॉबिनशन के अनुसार, युवतियों की गुमशुदगी की कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई गई थी, लेकिन परिजनों को बुलाया गया है।
जांच जारी, एफआईआर की प्रक्रिया
फिलहाल दुर्ग जीआरपी की टीम तीनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। मामले में ओरछा थाना क्षेत्र के परिजन भी FIR दर्ज करा रहे हैं। वहीं, सभी दस्तावेज और सबूतों की फॉरेंसिक जांच की तैयारी की जा रही है।