जामगांव आर में हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में श्रीराम दरबार की प्राण-प्रतिष्ठा, शोभायात्रा में उमड़े श्रद्धालु ! कारसेवकों के सम्मान में गुंजा जय श्रीराम का नारा,धर्मसभा में श्रीराम बालक दास बोले – ‘हर हृदय में हो राम का प्राकट्य, अब माँ कौशिल्या मंदिर निर्माण की बारी’”

जामगांव आर। पाटन ब्लॉक के जामगांव आर में इस वर्ष श्रीराम नवमी का पर्व रामभक्ति के महाउत्सव के रूप में मनाया गया। नगर के केंद्र बिंदु बाजार चौक स्थित नवनिर्मित श्रीराम मंदिर में शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच भगवान श्रीराम दरबार की प्राण-प्रतिष्ठा विधिवत संपन्न हुई। यह शुभ कार्य आचार्य मिथलेश शर्मा के सानिध्य में पवित्र मुहूर्त में शास्त्रीय पद्धति से संपन्न हुआ। उड़ीसा के कुशल कारीगरों द्वारा प्राचीन वास्तु शैली में निर्मित इस भव्य मंदिर में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने उपस्थित होकर प्रभु के दर्शन किए। नगर के कारसेवक जिलोखन चंद्राकर के परिवारजन मुख्य यजमान के रूप में इस पुण्य अवसर के साक्षी बने। रामनवमी के इस पावन पर्व से मंदिर के द्वार आमजन एवं रामभक्तों के लिए खोल दिए गए।पूजन-अर्चन एवं महायज्ञ के उपरांत जैन मंदिर के पास आयोजित महाभंडारे में मुख्य आयोजक संदीप चंद्राकर ने सपरिवार नगरवासियों के साथ मिलकर हजारों श्रद्धालुओं को ‘सीता रसोई’ से महाप्रसाद वितरित कराया।

कार्यक्रम के दूसरे चरण में सायं चार बजे जन कल्याण रामोत्सव समिति के नेतृत्व में बस स्टैंड से भव्य शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान हजारों की संख्या में महिला-पुरुष रामभक्त “जय श्रीराम” के गगनचुंबी उद्घोष के साथ नाचते-गाते, भगवा ध्वज लहराते हुए भगवान श्रीराम की आकर्षक झांकियों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होते हुए मुख्य मंदिर पहुंचे। यहां दर्शन-पूजन के पश्चात यह शोभायात्रा विशाल धर्मसभा में परिवर्तित हो गई। कार्यक्रम के दौरान  छत्तीसगढ़ के जामड़ी पाटेश्वर में निर्माणाधीन मां कौशिल्या धाम के लिए श्रद्धालुओं ने उदारतापूर्वक निधि समर्पित की, जिनका मंच से विशेष सम्मान किया गया। आयोजन में सहयोग देने वाले सभी दानदाताओं को भी व्यासपीठ से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का संचालन मनीष चंद्राकर ने किया, जबकि आभार प्रदर्शन किशोर साहू द्वारा व्यक्त किया गया। इस अवसर पर मंदिर निर्माणकर्ता संदीप चंद्राकर, बसंत चंद्राकर, नरेश केला,जिलोखन चंद्राकर,रूपेंद्रशुक्ला,राजकुमार,तीरथ,श्याम ऋषि,मोहन,गौकरण,शेखर चंद्राकर,रजनी बघेल,डा.दयाराम साहू,नीलम राजेश चंद्राकर,कल्पना नारद साहू,हर्षा लोकमणि चंद्राकर,जयप्रकाश चंद्राकर,,हलधर महमल्ला,रामकुमार चंद्राकर,कमलेश साहू,पूर्णेन्द्र सिन्हा,नरोत्तम साहू,आसकरण जैन,,राजा पाठक,प्रकाश चंद्राकर,सुरेश जैन,मैंघनाथ सागरवंशी,नरोत्तम साहू, प्रदीप साहू,मुकेश साहू,रवि सिन्हा,प्रणव शर्मा,विनोद साहू,लुभम बंछोर,अभिषेक सेन,कामता साहू,कन्हैया लाल साहू,मुरली राठी,मनीष जैन, नरसिग चंद्राकर,मोहन बघेल,युधिस्ठिर चंद्राकर,विशाखा चंद्राकर,उषा चंद्राकर,उमाचंद्राकर,रेणु चंद्राकर,शैलेन्द्री मंडावी,भारती सोनबर,त्रिवेणी साहू,अंगेश्वर साहू,जालम सेन,मुरली वैष्णव,अरुण चंद्राकर,दाऊ दास मानिकपुरी,छन्नु यादव,बुधारु साहू,हर्ष साहू सहित बड़ी संख्या मे क्षेत्र के नागरिक गण उपस्थित रहे।

• राम केवल उत्सव नहीं, जीवन का आदर्श बने -श्रीराम बालक दास 

धर्मसभा के मुख्य आचार्य बाल योगेश्वर श्रीराम बालक दास ने कहा कि सारा विश्व ईश्वर की लीला स्थली हैं वे सर्वत्र विराजमान हैं अयोध्या में प्रभु को उनका जन्मभूमि देने हिन्दू समाज ने बड़ा बलिदान दिया हैं ज़ब मंदिर बना तो छत्तीसगढ़ से अपने भांचा राम के लिए बड़ा सहयोग यहाँ से गया, दुनिया में और भारत में कहीं भी भगवान राम भांचा राम के रूप में स्नेह देने का अधिकार हम छत्तीसगढ़ियों को मिला हैं मां कौशिल्या छत्तीसगढ़ की बेटी और ज़ब राम का जन्मभूमि अब संवर गया तो अब बारी माँ कौशिल्या अम्बा को उनका दिव्य और भव्य मंदिर बनाने का हैं और इस संकल्प को पाटेश्वर धाम बहुत जल्द पूर्ण करने वाला हैं। आचार्य ने कहा रामनवमी मनाने का नहीं बल्कि मानने का अवसर हैं हमारे जीवन और मन में भी राम का प्राकट्य हो तभी जीवन सही दिशा में चलेगी उन्होने स्व धर्म और सनातन संस्कृति के लिए हिन्दू समाज की एकजुटता पर जोर देते हुए देश में गौ माता के संरक्षण के लिए आगे आने अपील भी की।

• इन कारसेवकों का हुआ विशेष सम्मान –

धर्मसभा में अयोध्या कारसेवा में योगदान देने वाले पाटन क्षेत्र के दो दर्जन कारसेवकों को स्मृति चिन्ह, श्रीफल एवं श्रीराम दुपट्टा भेंटकर सम्मानित किया गया जिनमे जिलोंखन चंद्राकर, कन्हैया लाल साहू,कचरी बाई भींगज, छन्नू लाल साहू, कचरा निर्मलकर जामगांव आर,टोपसिंह साहू रनचिरई,हलधर महमल्ला बेल्हारी,चेतन देवांगन,राजेंद्र साहू,समलिया साहू,छत्तर साहू,टीकाराम साहू, दौव्वा राम साहू मनोहर साहू, नरोत्तम साहू पाहंदा अ, विश्वकर्मा पाल उत्तर पाटन,डिलेन्द्र साहू, नीलकंठ साहू परसदा आदि शामिल हैं।

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