रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति में कांग्रेस की अंतर्कलह अब खुलकर सामने आने लगी है। मंगलवार को बिलासपुर में आयोजित कांग्रेस की सभा में पूर्व मंत्री अमरजीत भगत से माइक छीनने की घटना ने पूरे घटनाक्रम को नया मोड़ दे दिया है। भाजपा ने इसे कांग्रेस की बौखलाहट और आदिवासी नेताओं का अपमान बताते हुए करारा हमला बोला है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि कांग्रेस हार से बौखला चुकी है और अब उल-जुलूल हरकतों पर उतर आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस आज न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि देशभर में मुद्दाविहीन हो चुकी है।
इधर, भाजपा नेता और मंत्री रामविचार नेताम ने कहा कि कांग्रेस का आदिवासी नेताओं से मोहभंग हो चुका है। उन्होंने कहा कि अमरजीत भगत से मंच पर किया गया व्यवहार केवल उनका ही नहीं बल्कि पूरे आदिवासी समाज का अपमान है। नेताम ने याद दिलाया कि इसके पहले मोहन मरकाम और अब प्रदेश अध्यक्ष तक के साथ इसी तरह का व्यवहार कांग्रेस ने किया है।
सभा में कांग्रेस नेताओं की गुटबाजी साफ नजर आई। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने मंच से ही टी.एस. सिंहदेव पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस की हार का कारण वोट चोरी है, न कि हमारी सरकार की नाकामी। वहीं, पूर्व मंत्री शिवकुमार डहरिया ने नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत को घेरते हुए कहा कि कार्यकर्ता किसी नेता के चमचे नहीं हैं। हमें अपने ही नेताओं को कटघरे में खड़ा करने की बजाय एकजुट होकर काम करना चाहिए। कांग्रेस ने इस सभा के जरिए भाजपा सरकार पर हमला करने और एकजुटता दिखाने की कोशिश की थी, लेकिन सचिन पायलट की मौजूदगी में ही आपसी मतभेद और माइक छीनने जैसी घटनाओं ने पार्टी की गुटबाजी को और गहरा कर दिया। भाजपा अब इसे कांग्रेस के भीतर सत्ता संघर्ष और आदिवासी नेताओं के अपमान से जोड़कर बड़ा राजनीतिक मुद्दा बना रही है।