खेत का रकबा बढ़ाने की चाह में तोड़ डाला सरकारी चेक डैम ! बेल्हारी में नाले तक बढ़ा दी मेड़, किसानों के रास्ते पर भी चला जेसीबी

खेत का रकबा बढ़ाने की चाह में तोड़ डाला सरकारी चेक डैम ! बेल्हारी में नाले तक बढ़ा दी मेड़, किसानों के रास्ते पर भी चला जेसीबी

[ सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का आरोप, ग्रामीणों ने कार्रवाई नहीं होने पर शिकायत की चेतावनी दी ]
जामगांव आर। पाटन ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेल्हारी में सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और नाले की भूमि पर अतिक्रमण का मामला सामने आया है। आरोप है कि एक किसान ने अपने खेत का रकबा बढ़ाने के उद्देश्य से जेसीबी मशीन लगाकर खेत की मेड़ को आगे बढ़ाते हुए नाले के हिस्से तक पहुंचा दिया। इतना ही नहीं, भैंसासुर नाले पर सरकारी मद से निर्मित चेक डैम और किसानों के आवागमन के लिए बनी पुलिया को भी क्षतिग्रस्त कर दिया गया। ग्रामीणों के अनुसार बेल्हारी स्थित भैंसासुर नाले में बने चेक डैम और पुलिया को स्थानीय किसान द्वारा जेसीबी से तोड़ा गया। सोमवार को मामले को लेकर ग्राम समिति और पंचायत प्रतिनिधियों के बीच चर्चा और शिकायतों का दौर शुरू हो गया है। मौके पर जुटे ग्रामीणों ने इस कृत्य को अवैध बताते हुए क्षतिग्रस्त संरचनाओं को पूर्व स्थिति में बहाल करने की मांग की है।

स्थानीय कृषक बाबूलाल साहू ने कहा कि यदि जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे संबंधित विभागों और प्रशासन से औपचारिक शिकायत करेंगे। ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने से किसानों को आने-जाने में परेशानी हो रही है और नाले की प्राकृतिक संरचना भी प्रभावित हुई है।
वहीं आरोपों को लेकर भूमि स्वामी बबिता जैन के पति सुरेश जैन ने अनभिज्ञता जताते हुए कहा कि उन्होंने खेत को रेगहा दिया है अब वो क्या कर रहे ये मै नही जानता। दूसरी ओर उक्त खेत को रेग में क़ृषि करने वाले पूरन कुमार साहू का कहना है कि यह खेत हर वर्ष डुबान की चपेट में आ जाता है, इसलिए सरपंच से चर्चा और उनकी मौखिक सहमति के बाद कार्य कराया गया।

मामले में नया मोड़ तब आया जब पंचायत सचिव कामता पटेल ने किसी भी प्रकार की अनुमति दिए जाने से इनकार कर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि इस संबंध में पंचायत को कोई आवेदन प्राप्त नहीं हुआ और न ही किसी किसान को चेक डैम या पुलिया तोड़ने की अनुमति दी गई। पंचायत का इस कार्य से कोई संबंध नहीं है। घटना के बाद गांव में चर्चा का माहौल है और अब ग्रामीण प्रशासन से निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो यह मामला सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और अतिक्रमण से जुड़ा गंभीर प्रकरण बन सकता है।

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