दुर्ग धर्मांतरण प्रकरण में ननों की जमानत याचिका खारिज — कांग्रेस सांसदों ने दुर्ग जेल में की मुलाकात, कहा ‘यह अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर हमला’

दुर्ग । रेलवे स्टेशन दुर्ग में तीन नाबालिग लड़कियों को कथित रूप से बहला-फुसलाकर ईसाई धर्म में जबरन दीक्षा दिलाने के प्रयास में गिरफ्तार तीनों आरोपियों की जमानत याचिका न्यायालय द्वारा सख्ती से खारिज कर दी गई है। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी द्विजेंद्र नाथ ठाकुर की अदालत ने 8 अगस्त तक न्यायिक रिमांड देते हुए यह टिप्पणी की कि यह अपराध गंभीर प्रकृति का है, जिसमें आजीवन कारावास तक का प्रावधान है और यह गैर-जमानती है। अतः वर्तमान परिस्थितियों में आरोपियों को जमानत का लाभ देना न्यायहित में नहीं होगा। गौरतलब है कि आरोपित सुफियान मंसूरी, वंदना प्रांसिंग पिता मैट्यू, और पुष्पम मंडल पर शिकायतकर्ता रवी निगम की तहरीर पर छत्तीसगढ़ धर्म स्वतंत्रता अधिनियम 1968 की धारा 4 तथा भारतीय दंड संहिता की धारा 143 के तहत मामला दर्ज किया गया है। आरोपियों पर तीन नाबालिग लड़कियों को रायपुर ले जाकर धर्मांतरण की कोशिश का आरोप है।

राजनीतिक रंग लेता मामला : कांग्रेस सांसद पहुँचे जेल

इस मामले ने अब जोरदार राजनीतिक मोड़ ले लिया है। आरोपितों में से दो महिलाओं के ईसाई नन होने के कारण कांग्रेस ने इसे ‘अल्पसंख्यकों की धार्मिक स्वतंत्रता पर सीधा हमला’ करार दिया है। केरल से सांसद एन.के. प्रेमचंदन के नेतृत्व में कांग्रेस सांसदों का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को दुर्ग जिला जेल पहुँचा और तीनों आरोपितों से मुलाकात की। इस प्रतिनिधिमंडल में सांसद बेनी बहनन, फ्रांसिस जॉर्ज, अनिल ए. थॉमस, सप्तगिरी उल्का और जरीता लैतफ़लांग शामिल थे।मुलाकात के बाद मीडिया से चर्चा में सांसद प्रेमचंदन ने कहा कि यह गिरफ्तारी झूठे और आधारहीन आरोपों पर की गई है। महिलाएं केवल युवतियों को रोजगार के लिए ले जा रही थीं। उन पर धर्मांतरण और मानव तस्करी जैसे गंभीर आरोप लगाकर निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे “मौलिक अधिकारों पर हमला” बताया और दावा किया कि “भाजपा शासित राज्यों में ईसाई समुदाय पर हमले बढ़े हैं।”

संसद में उठेगा मुद्दा, गृह मंत्री से मिलेंगे सांसद

कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल ने स्पष्ट किया कि यह मामला अब केवल कानूनी नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक स्वतंत्रता और अल्पसंख्यक अधिकारों से जुड़ा विषय बन चुका है। सांसदों ने कहा है कि वे इस मुद्दे को लोकसभा में उठाएंगे और गृह मंत्री अमित शाह से मिलकर हस्तक्षेप की मांग करेंगे। आवश्यकता पड़ी तो वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से भी मुलाकात करेंगे।

प्रशासन सतर्क, जांच टीम रवाना

इधर, छत्तीसगढ़ जीआरपी ने मामले को गंभीर मानते हुए तीनों आरोपितों को न्यायिक रिमांड पर भेज दिया है और नारायणपुर में विशेष जांच टीम रवाना की गई है, ताकि धर्मांतरण के इस पूरे नेटवर्क की परत-दर-परत जांच की जा सके।

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