रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में शुक्रवार को मंत्रालय महानदी भवन में आयोजित छत्तीसगढ़ मंत्रिपरिषद की बैठक में राज्य के सर्वांगीण विकास हेतु 11 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को स्वीकृति प्रदान की गई। उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि यह बैठक सामाजिक न्याय, आर्थिक मजबूती, शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रशासनिक सुधार की दिशा में प्रभावी साबित होगी।
राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को राहत:
बैठक में वर्ष 2005 से 2009 बैच के राज्य पुलिस सेवा अधिकारियों को वरिष्ठ वेतनमान देने हेतु 30 सदस्यीय समिति के गठन का निर्णय लिया गया, जिससे इन अधिकारियों को सेवा लाभ का लाभ मिल सकेगा।
जनजातीय व वंचित वर्गों के लिए संयुक्त पहल:
छत्तीसगढ़ शासन और पैन आईआईटी एलुमनी रीच फॉर इंडिया फाउंडेशन (PanIIT) के मध्य एक संयुक्त गैर-लाभकारी कंपनी के गठन को मंजूरी दी गई। यह कंपनी अनुसूचित जनजाति, गरीब, महिलाएं व तृतीय लिंग समुदाय के लोगों को शिक्षा, कौशल विकास और उद्यमिता के माध्यम से आजीविका एवं आर्थिक सशक्तिकरण प्रदान करेगी।
पुराने वाहनों पर नियंत्रण:
पुराने वाहनों से होने वाले वायु प्रदूषण और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मोटरयान कराधान अधिनियम 1991 एवं मोटरयान नियम 1994 में आवश्यक संशोधन प्रस्ताव को कैबिनेट से स्वीकृति मिली।
निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना को मिली मंजूरी:
राज्य में उच्च शिक्षा को बढ़ावा देने हेतु छत्तीसगढ़ निजी विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2025 के प्रारूप को मंजूरी दी गई है।
छात्र स्टार्टअप और नवाचार नीति लागू होगी:
राज्य सरकार ने विद्यार्थियों को नवाचार और स्टार्टअप से जोड़ने के लिए छात्र स्टार्टअप एवं नवाचार नीति लागू करने का निर्णय लिया है। इसके अंतर्गत 100 तकनीकी संस्थानों के 50 हजार छात्रों तक पहुंच, 500 प्रोटोटाइप, 150 स्टार्टअप को इनक्यूबेशन में सहायता दी जाएगी।
राजधानी क्षेत्र का विकास तेज़ी से होगा:
रायपुर, दुर्ग-भिलाई और नया रायपुर अटल नगर को मिलाकर राजधानी क्षेत्र (State Capital Region) के विकास हेतु एक विशेष प्राधिकरण के गठन को मंजूरी दी गई है। वर्ष 2031 तक इस क्षेत्र में अनुमानित 50 लाख आबादी को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
कृषि, व्यापार और भूमि सुधार को बढ़ावा:
मंत्रिपरिषद ने कृषि उपज मंडी अधिनियम 2025, छत्तीसगढ़ माल और सेवा कर संशोधन विधेयक 2025, बकाया कर, ब्याज व शास्ति के निपटान विधेयक 2025 तथा छत्तीसगढ़ भू-राजस्व संहिता संशोधन विधेयक 2025 को भी स्वीकृति दी। इससे किसानों, व्यापारियों और ज़मीन से जुड़े विवादों के शीघ्र समाधान का रास्ता खुलेगा।