रायपुर। छत्तीसगढ़ में बेरोजगार युवाओं को सरकारी स्कूलों में शिक्षक बनने का सपना दिखाकर री इंडिया स्किल वेलफेयर फाउंडेशन नामक एनजीओ ने करोड़ों की ठगी कर सनसनी फैला दी है। रायपुर के अंबेडकर चौक स्थित शहीद वीर नारायण सिंह परिसर से संचालित इस एनजीओ पर करीब 300 से अधिक युवाओं से करोड़ों रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। संस्था के डायरेक्टर राजू रात्रे और अल्फिजा फातिमा अब फरार हैं और एनजीओ का दफ्तर 1 जुलाई से बंद पड़ा है।
ऐसे रची गई करोड़ों की ठगी की साजिश
जानकारी के मुताबिक एनजीओ ने अखबारों और सोशल मीडिया के माध्यम से यह प्रचारित किया कि वह सरकारी स्कूलों में नि:शुल्क शिक्षा के लिए शिक्षक नियुक्त कर रही है और ₹22,000 मासिक वेतन दिया जाएगा। इस झांसे में आकर प्रदेश भर से सैकड़ों युवक-युवतियां जुड़ गए। एनजीओ ने उम्मीदवारों को रायपुर समेत विभिन्न जिलों के सरकारी स्कूलों में पढ़ाने भेजा और “सिक्योरिटी डिपॉजिट” के नाम पर 2 से 5 लाख रुपये तक वसूले। साथ ही, उन्हें जॉइनिंग लेटर भी थमाया गया, जिसमें 58 वर्ष की आयु तक सेवा में बने रहने का वादा किया गया।
शुरुआत में वेतन देकर जमाया भरोसा
पीड़ितों ने बताया कि पहले कुछ महीनों तक उन्हें वेतन भी मिला, जिससे एनजीओ पर भरोसा बना रहा। लेकिन इसके बाद धीरे-धीरे सैलरी में देरी होने लगी और फिर अचानक बंद हो गई। कई शिक्षक एक साल तक पढ़ाने के बावजूद बिना वेतन रह गए। जब वेतन की मांग की गई, तो एनजीओ के कर्मचारियों ने झूठे आश्वासन दिए और बाद में ऑफिस बंद कर दिया गया।
पुलिस में शिकायत, जांच शुरू
रायपुर सिविल लाइन थाना में अब तक दो दर्जन से अधिक पीड़ितों ने शिकायत दर्ज कराई है। रायपुर के एएसपी कीर्तन राठौर ने बताया कि यह एनजीओ प्रदेश के कई जिलों में सक्रिय था और अब तक 300 से ज्यादा लोगों को शिकार बना चुका है। शिकायतकर्ताओं में सुरभि सोनी, पलक गायकवाड़, प्रसेन जीत भारद्वाज, चंद्रकांता पटेल, सरोजिनी कंवर, यशोदा कंवर, गीतांजलि साहू, जयश्री ध्रुव, मनीषा बाघमरे, रूपा वर्मा सहित अन्य शामिल हैं। पीड़ितों का यह भी आरोप है कि कई बिचौलियों ने पैसे लेकर नियुक्ति की व्यवस्था कराई थी।
क्या आगे होगा..?
पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है और फरार डायरेक्टरों की तलाश में टीमें गठित की गई हैं। पीड़ित युवा अब न्याय की आस लगाए बैठे हैं। प्रशासन पर जल्द कार्रवाई और दोषियों की गिरफ्तारी का दबाव बढ़ता जा रहा है।