गुंडरदेही (यूकेश चंद्राकर)। गुंडरदेही क्षेत्र के ग्राम चंदनबिरही में आस्था और परंपरा का अनूठा संगम देखने को मिलता है। यहां वर्ष 1926 से होलिका दहन नहीं किया जाता। इसके स्थान पर हर वर्ष रामनाम अखंड सप्ताह यज्ञ का आयोजन किया जाता है। इस वर्ष यह परंपरा अपने 100 वर्ष पूर्ण कर रही है, जिससे गांव में विशेष उत्साह का माहौल है। ग्रामीण बबलू साहू ने बताया कि वर्ष 1926 में शुरू हुई इस धार्मिक परंपरा ने अब शताब्दी वर्ष में प्रवेश कर लिया है। 1 से 8 मार्च तक आयोजित होने वाला यह अनुष्ठान इस बार विशेष महत्व रखता है। आयोजन की सभी तैयारियां समिति और ग्रामीणों के सहयोग से पूरी कर ली गई हैं। यह रामनाम अखंड सप्ताह प्रतिवर्ष फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष त्रयोदशी तिथि से चैत्र कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि तक सात दिनों तक 24 घंटे निरंतर चलता है। इस दौरान रामनाम का अखंड जाप किया जाता है। यज्ञ एवं ग्राम की आराध्य देवी श्री सिद्धपीठ मां बगदई के दर्शन के लिए क्षेत्र सहित दूर-दराज से श्रद्धालु पहुंचते हैं।
ऐसे बंद हुई होलिका दहन की परंपरा
ग्रामीणों के अनुसार, वर्ष 1926 से पहले फाल्गुन माह में गांव में प्रसव होने पर नवजात शिशु जीवित नहीं रह पाते थे। इस कारण फाल्गुन लगने से पहले गर्भवती महिलाओं को उनके मायके भेजने की परंपरा थी। समस्या के समाधान के लिए क्षेत्र के तत्कालीन जमींदार ठाकुर निहाल सिंह के मार्गदर्शन में वृंदावन से लौटने के बाद गांव की आराध्य देवी मां बगदई के प्रांगण में अखंड रामनाम सप्ताह यज्ञ का शुभारंभ कराया गया। ग्रामीणों का मानना है कि इस अनुष्ठान के बाद हालात में सुधार हुआ। तभी से गांव में होलिका दहन की परंपरा बंद कर दी गई और रामनाम अखंड सप्ताह यज्ञ की शुरुआत हुई, जो पिछले 100 वर्षों से निरंतर जारी है।