CG-RTE फंड घोटाले की जांच तेज : NCPCR का दुर्ग कलेक्टर को नोटिस,फर्जी छात्र संख्या दिखाकर सरकारी राशि हड़पने का आरोप, 20 दिन में मांगी रिपोर्ट

CG-RTE फंड घोटाले की जांच तेज : NCPCR का दुर्ग कलेक्टर को नोटिस,फर्जी छात्र संख्या दिखाकर सरकारी राशि हड़पने का आरोप, 20 दिन में मांगी रिपोर्ट

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में शिक्षा के अधिकार अधिनियम (RTE) के तहत मिलने वाले सरकारी फंड में कथित गड़बड़ी और फर्जीवाड़े का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) ने दुर्ग कलेक्टर को नोटिस जारी कर 20 दिनों के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं। जानकारी के मुताबिक कुछ निजी स्कूलों पर आरटीई के तहत फर्जी छात्र संख्या दिखाकर शासन से प्रतिपूर्ति राशि लेने का आरोप लगा है। शिकायत में दावा किया गया है कि कई संस्थानों ने दस्तावेजों में हेरफेर कर ऐसे विद्यार्थियों के नाम पर भी राशि प्राप्त की, जिनका वास्तविक रिकॉर्ड संदिग्ध पाया गया।

बताया जा रहा है कि शिकायत ई-बाल निदान पोर्टल के माध्यम से की गई थी। प्रारंभिक जांच में मामला गंभीर मिलने के बाद आयोग ने कार्रवाई शुरू की। आयोग के निदेशक वी. रामानधा रेड्डी की ओर से जारी नोटिस में स्पष्ट कहा गया है कि यदि आरोप सही पाए गए तो यह सरकारी धन के दुरुपयोग के साथ बच्चों के शिक्षा अधिकार का भी गंभीर उल्लंघन माना जाएगा। सूत्रों के अनुसार जिला प्रशासन और शिक्षा विभाग अब निजी स्कूलों के छात्र रिकॉर्ड, बैंक भुगतान विवरण और आरटीई प्रतिपूर्ति दस्तावेजों की जांच में जुट गए हैं। जांच में अनियमितता साबित होने पर संबंधित स्कूलों के खिलाफ आर्थिक व कानूनी कार्रवाई हो सकती है।

इस पूरे मामले ने जिले की शिक्षा व्यवस्था और आरटीई योजना के क्रियान्वयन पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। शिक्षा के अधिकार कानून का उद्देश्य गरीब और वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराना है, लेकिन यदि योजना में भ्रष्टाचार और फर्जीवाड़ा सामने आता है तो इसका सीधा नुकसान जरूरतमंद बच्चों को उठाना पड़ सकता है।

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