
भिलाई। छत्तीसगढ़ के पारंपरिक त्योहार हरेली के अवसर पर रविवार को भिलाई में भव्य जबर हरेली रैली निकाली गई। पावर हाउस से रिसाली दशहरा मैदान तक निकली इस रैली में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, परंपरा और ग्रामीण जीवन की झलक देखने को मिली। छत्तीसगढ़ी क्रांति सेना के नेतृत्व में आयोजित रैली में प्रदेशभर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रैली में सैकड़ों कलाकार पारंपरिक वेशभूषा में लोक नृत्य करते हुए आगे बढ़े। गेड़ी, पंथी, सुआ, कर्मा और ददरिया समेत छत्तीसगढ़ के पारंपरिक नृत्यों ने लोगों का ध्यान आकर्षित किया। डीजे और लोक संगीत की धुनों के बीच पूरे मार्ग पर उत्सव का माहौल बना रहा।
बच्चों से बुजुर्गों तक सभी ने लिया हिस्सा
जबर हरेली रैली में बच्चे, युवा, महिलाएं और बुजुर्ग सभी वर्गों के लोग शामिल हुए। कई प्रतिभागी पारंपरिक वेशभूषा में नजर आए। लोगों ने गेड़ी चलाकर और लोक नृत्य प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत किया। रैली में शामिल कलाकारों और प्रतिभागियों में खासा उत्साह देखने को मिला। प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों से आए लोगों ने भी इस आयोजन में अपनी भागीदारी निभाई।
छत्तीसगढ़ी महतारी और किसानों की झांकियां बनी आकर्षण
रैली में छत्तीसगढ़ी महतारी की भव्य झांकी आकर्षण का प्रमुख केंद्र रही। इसके अलावा किसानों के जीवन और उनकी समस्याओं को प्रदर्शित करती झांकियां भी शामिल की गईं। बैलगाड़ियों का काफिला छत्तीसगढ़ के पारंपरिक ग्रामीण जीवन की याद दिलाता नजर आया। झांकियों के जरिए छत्तीसगढ़ की संस्कृति के साथ किसानों और गांवों से जुड़े मुद्दों को भी सामने रखने का प्रयास किया गया।
सेंट्रल एवेन्यू पर जगह-जगह हुआ स्वागत
पावर हाउस से शुरू हुई रैली सेंट्रल एवेन्यू से होते हुए रिसाली दशहरा मैदान तक पहुंची। रास्ते में विभिन्न समाजों और सामाजिक संस्थाओं की ओर से रैली का स्वागत किया गया। कई स्थानों पर लोगों ने स्टॉल लगाए और रैली में शामिल लोगों को खाद्य सामग्री वितरित की। स्वागत के दौरान बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी मौजूद रहे। जबर हरेली रैली ने छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक नृत्य और ग्रामीण जीवन की झलक एक साथ प्रस्तुत की। आयोजन में शामिल लोगों ने हरेली के जरिए प्रदेश की परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का संदेश दिया।