बिलासपुर, 2 अप्रैल 2026। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड में बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अहम फैसला सुनाते हुए पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के पुत्र अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह आदेश जारी किया, जिसे अमित जोगी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।
📌 क्या है पूरा मामला
यह मामला 4 जून 2003 का है, जब रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। उस समय यह घटना पूरे छत्तीसगढ़ में सनसनी बन गई थी। जग्गी, विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे और नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) में महत्वपूर्ण पद पर थे। हत्या मामले में कुल 31 लोगों को आरोपी बनाया गया था। लंबी सुनवाई के बाद 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने 28 आरोपियों को दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। हालांकि, सबूतों के अभाव में अमित जोगी को उस समय बरी कर दिया गया था।
⚖️ कानूनी लड़ाई और नया मोड़
मृतक के पुत्र सतीश जग्गी ने निचली अदालत के फैसले को चुनौती दी थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जहां से इसे दोबारा सुनवाई के लिए हाईकोर्ट भेजा गया।
अब छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी करते हुए अमित जोगी को तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने का निर्देश दिया है।
👥 अन्य दोषी आरोपी
इस केस में अभय गोयल, याहया ढेबर, वी.के. पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन और सूर्यकांत तिवारी समेत कई आरोपियों को दोषी पाया गया था और सजा सुनाई जा चुकी है।
करीब दो दशक पुराने इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में हाईकोर्ट का यह फैसला एक बड़ा कानूनी घटनाक्रम माना जा रहा है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि अमित जोगी अदालत के निर्देशानुसार कब सरेंडर करते हैं और आगे की न्यायिक प्रक्रिया किस दिशा में बढ़ती है।