महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! पुरुष बना ‘महतारी’, 12 महीने तक खाते में आती रही राशि

महतारी वंदन योजना में बड़ा फर्जीवाड़ा! पुरुष बना ‘महतारी’, 12 महीने तक खाते में आती रही राशि

आवेदन में खुद को ही बताया पति, फिर भी हुआ सत्यापन; एक साल बाद खुली गड़बड़ी, जांच के घेरे में विभाग

खैरागढ़, 8 जुलाई। महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण के उद्देश्य से संचालित महतारी वंदन योजना में चौंकाने वाला फर्जीवाड़ा सामने आया है। खैरागढ़ जिले के ग्राम मुढ़ीपार निवासी तिलोक साहू नामक एक पुरुष का आवेदन योजना में स्वीकृत हो गया और उसके बैंक खाते में लगातार 12 महीनों तक योजना की राशि जमा होती रही। हैरानी की बात यह है कि आवेदन में हितग्राही और पति, दोनों के नाम तिलोक साहू ही दर्ज थे, इसके बावजूद आवेदन का सत्यापन कर भुगतान जारी कर दिया गया। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार आवेदन को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और संबंधित सुपरवाइजर स्तर पर सत्यापित किया गया था। सत्यापन के बाद हर महीने योजना की राशि लाभार्थी के खाते में पहुंचती रही। यह मामला करीब एक वर्ष बाद सामने आया, जिससे पूरी सत्यापन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

रिकॉर्ड में दिखा ‘परमानेंट होल्ड’

मामला उजागर होने के बाद ऑनलाइन पोर्टल पर संबंधित आवेदन की स्थिति ‘परमानेंट होल्ड’ और ‘लाभ त्याग अनुरोध स्वीकृत’ दिखाई दे रही है। हालांकि यह सवाल अब भी बना हुआ है कि यदि गड़बड़ी सामने नहीं आती, तो क्या भुगतान आगे भी जारी रहता।

12 महीने भुगतान, रिकवरी सिर्फ 10 महीने की?

मामले में एक और विसंगति सामने आई है। ऑनलाइन रिकॉर्ड के अनुसार लाभार्थी को 12 महीनों तक राशि का भुगतान हुआ, लेकिन 3 जुलाई 2026 को एकीकृत बाल विकास सेवा परियोजना, खैरागढ़ द्वारा बैंक को भेजे गए पत्र में केवल 10 हजार रुपये शासन के खाते में वापस जमा कराने के निर्देश दिए गए। ऐसे में सवाल उठ रहे हैं कि यदि 12 किस्तों का भुगतान हुआ, तो केवल 10 महीने की राशि की ही रिकवरी क्यों की गई? शेष राशि का क्या हुआ, इसका जवाब विभागीय जांच के बाद ही सामने आएगा।

अधिकारी बोले- रिकॉर्ड देखकर देंगे पूरी जानकारी

जिला परियोजना अधिकारी पी.आर. खुटेल ने बताया कि संबंधित हितग्राही से राशि की रिकवरी कर ली गई है। हालांकि अन्य तथ्यों के संबंध में उन्होंने रिकॉर्ड का परीक्षण करने के बाद विस्तृत जानकारी देने की बात कही।

सत्यापन प्रक्रिया पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना ने महतारी वंदन योजना की सत्यापन व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं। महिलाओं के लिए बनाई गई योजना में एक पुरुष का आवेदन कैसे स्वीकृत हो गया? आवेदन में हितग्राही और पति का नाम एक ही होने के बावजूद सत्यापन कैसे हो गया? और एक वर्ष तक किसी स्तर पर इस गड़बड़ी का पता क्यों नहीं चल सका? अब इस मामले में केवल राशि की रिकवरी ही नहीं, बल्कि आवेदन का सत्यापन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय करने की मांग भी उठने लगी है। यह घटना सरकारी योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था को लेकर भी कई अहम सवाल खड़े करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *