शासकीय स्कूलों में मंत्र-वंदना अनिवार्यता के विरोध में राष्ट्रपति को ज्ञापन, संवैधानिक समीक्षा की मांग

भिलाई। छत्तीसगढ़ शासन के स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा शासकीय विद्यालयों में प्रार्थना सभा के दौरान दीप मंत्र, सरस्वती वंदना, गुरु मंत्र, गायत्री मंत्र एवं शांति मंत्र जैसे धार्मिक अनुष्ठानों के संचालन संबंधी जारी आदेश के विरोध में भिलाई निवासी अली हुसैन सिद्दीकी ने भारत की राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजकर हस्तक्षेप की मांग की है। ज्ञापन में कहा गया है कि स्कूल शिक्षा विभाग के आदेश क्रमांक GENCOR-35010/1981/2026-SCHOOL EDUCATION SECTION दिनांक 12 जून 2026 के तहत शासकीय विद्यालयों में विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों एवं वंदनाओं को शामिल करने के निर्देश दिए गए हैं। आवेदक का आरोप है कि यह व्यवस्था संविधान की धर्मनिरपेक्ष भावना के विपरीत है तथा इससे विभिन्न धर्मों एवं आस्थाओं से जुड़े विद्यार्थियों के बीच असहजता की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।

अली हुसैन सिद्दीकी ने अपने ज्ञापन में कहा है कि संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 21, 25, 28 और 29 सभी नागरिकों को समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने का अधिकार प्रदान करते हैं। ऐसे में किसी एक धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों और अनुष्ठानों को शासकीय विद्यालयों में संस्थागत रूप से लागू करना संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप नहीं माना जा सकता। ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया है कि देश में बेरोजगारी, शिक्षा, स्वास्थ्य, महंगाई और सामाजिक न्याय जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों के बीच ऐसे निर्णय सामाजिक और धार्मिक ध्रुवीकरण को बढ़ावा दे सकते हैं। इससे अल्पसंख्यक समुदायों में अपने अधिकारों और संवैधानिक सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ने की आशंका जताई गई है। राष्ट्रपति से की गई प्रमुख मांगों में उक्त आदेश की संवैधानिक समीक्षा, शासकीय विद्यालयों में किसी विशेष धार्मिक परंपरा से जुड़े मंत्रों एवं अनुष्ठानों की अनिवार्यता पर रोक, विद्यालयों में संविधान, राष्ट्रीय एकता, वैज्ञानिक दृष्टिकोण और नैतिक मूल्यों पर आधारित गतिविधियों को बढ़ावा देने तथा मानवाधिकार संस्थाओं से मामले की जांच कराने की मांग शामिल है।

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