दुर्ग-भिलाई। छत्तीसगढ़ के पहले और ऐतिहासिक जू ‘मैत्री बाग’ के संचालन एवं संभावित निजीकरण को लेकर अहम हलचल तेज हो गई है। दुर्ग जिले के भिलाई इस्पात संयंत्र (BSP) टाउनशिप में स्थित इस लगभग 60 वर्षीय जू को निजी एजेंसी को आउटसोर्स करने की प्रक्रिया पहले से जारी है, लेकिन अब नए प्रस्ताव से मामले ने और तूल पकड़ लिया है। वैशाली नगर विधायक रिकेश सेन ने BSP प्रबंधन को जू का संचालन राज्य शासन को हस्तांतरित (हैंडओवर) करने का प्रस्ताव दिया है, जिस पर जल्द अंतिम फैसला हो सकता है।
•विधायक का प्रस्ताव— पर्यटन-वन विभाग से होगा विकास का विस्तार
विधायक रिकेश सेन ने BSP मैनेजमेंट के समक्ष यह सुझाव रखा कि मैत्री बाग का संचालन पर्यटन विभाग और वन विभाग के संयुक्त सहयोग से कराया जाए। उन्होंने कहा कि जू के राज्य सरकार के अधीन आने के बाद इसका व्यापक और आधुनिक विकास संभव होगा। प्रस्ताव में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार, आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, पर्यावरण संरक्षण आधारित पहलें और वन्य प्राणियों की बेहतर देखभाल को प्राथमिकता देने की बात कही गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि राज्य शासन को जिम्मा मिलने पर कर्मचारियों की व्यवस्था आउटसोर्सिंग मॉडल के तहत की जा सकती है, जिससे कैंटीन, टॉय-ट्रेन, बोटिंग, पार्किंग व अन्य सहायक सेवाओं का संचालन सुगम हो सकेगा।
• BSP प्रबंधन का रुख— सहमति के संकेत
सूत्रों के अनुसार, BSP प्रबंधन इस प्रस्ताव पर सहमति व्यक्त कर सकता है। आगे की प्रक्रिया राज्य सरकार के साथ समन्वय के बाद तय की जाएगी। मंगलवार को हुई फाइनल बैठक में BSP की ओर से एक्टिंग GM टाउनशिप ए.बी. श्रीनिवास, GM शिक्षा विभाग शिखा दुबे, GM डॉ. नवीन जैन, DGM टाउनशिप आर.के. गर्ग सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
•मैत्री बाग— ‘वाइट टाइगर हब’ की पहचान
मैत्री बाग ने राष्ट्रीय स्तर पर छत्तीसगढ़ को विशेष पहचान दिलाई है। यहाँ अब तक 19 सफेद बाघों का जन्म हो चुका है, जिनमें से 13 बाघ देश के विभिन्न जू— राजकोट, कानपुर, बोकारो, इंदौर, मुकुंदपुर, रायपुर आदि को दिए जा चुके हैं।
वर्तमान में जू में 6 सफेद बाघ मौजूद हैं। देश में कुल लगभग 160 सफेद बाघों में से 19 अकेले मैत्री बाग की देन रहा है, जिससे इसे ‘White Tiger Hub’ के रूप में जाना जाता है।मैत्री बाग की शुरुआत 1965 में एक गार्डन के रूप में हुई थी और 1972 में जू के रूप में इसे विकसित किया गया। करीब 140 एकड़ में फैला यह परिसर आज 400 से अधिक वन्य जीवों का आशियाना है, जिनमें हायना, लेपर्ड, लोमड़ी, हायना, लकड़बग्घा, घड़ियाल, सांभर, नीलगाय जैसी प्रजातियाँ प्रमुख आकर्षण में शामिल हैं। बोटिंग, टॉय-ट्रेन और म्यूजिकल फाउंटेन जैसी सुविधाएँ इसे परिवारों की पहली पसंद बनाती हैं।
• आर्थिक घाटा बनी मुख्य वजह— निजीकरण की प्रक्रिया जारी
मैत्री बाग में प्रतिवर्ष 12 लाख से अधिक पर्यटक पहुंचते हैं। BSP प्रबंधन हर साल करीब 4 करोड़ रुपए खर्च करता है, जबकि ₹20 की टिकट दर से वार्षिक आय लगभग 1.5 करोड़ है। यानी — हर साल लगभग ढाई करोड़ रुपए का आर्थिक घाटा जू पर पड़ रहा है, जो निजीकरण की मुख्य वजह मानी जा रही है। वर्तमान में बोटिंग, गार्डन, पार्किंग पहले से ठेके पर चल रहे हैं, लेकिन यह पहली बार होगा जब पूरा जू निजी हाथों में जा सकता है। निजी प्रबंधन से आधुनिक सुविधाओं की उम्मीद के साथ ही टिकट दर बढ़ने की संभावना भी जताई जा रही है।
• BSP स्कूलों और CSPDCL MOU पर भी चिंता
BSP टाउनशिप के स्कूलों को 30 वर्ष की लीज पर बड़े शिक्षण समूहों को देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा जारी है। BSP प्रबंधन ने भरोसा दिलाया है कि वर्तमान में पढ़ रहे विद्यार्थियों से 12वीं तक पुरानी दर पर फीस ली जाएगी।
वहीं BSP और छत्तीसगढ़ State Power Distribution Company Limited (CSPDCL) के बीच हुए MOU में कुछ बिंदुओं पर संयंत्र कर्मचारियों ने आपत्ति दर्ज कराई है। विधायक ने कहा कि वे इन विषयों पर CSPDCL के साथ बैठक कर समाधान निकालेंगे।
•राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि— जल्द अंतिम फैसला
मैत्री बाग न केवल छत्तीसगढ़ की धरोहर है, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा और वन्य जीव संरक्षण में भी राज्य की पहचान को मजबूत करता रहा है। अब देखना अहम होगा कि जू निजी हाथों में जाएगा या राज्य शासन के अधीन व्यापक विकास यात्रा की शुरुआत करेगा। आयोगन एवं समन्वय बैठकों पर सरकार और BSP प्रबंधन की नज़र लगी है, और जल्द ही अंतिम निर्णय की उम्मीद है।