

YC न्यूज़ डेस्क। नाग पंचमी के पावन अवसर पर देशभर में नाग देवता की पूजा-अर्चना की जा रही है। सनातन परंपरा में नाग देवता का विशेष धार्मिक महत्व है और भगवान शिव के साथ नागों का गहरा संबंध माना जाता है। हालांकि, इस पर्व पर एक सवाल अक्सर सामने आता है कि क्या जीवित सांप को दूध पिलाना धार्मिक रूप से उचित है? धर्म विशेषज्ञों के अनुसार, जीवित सर्प को पकड़कर जबरन दूध पिलाने का विधान शास्त्रों में नहीं मिलता। सनातन परंपरा में जीव-दया को विशेष महत्व दिया गया है। ऐसे में नाग पंचमी पर नाग देवता की प्रतिमा, शिवलिंग अथवा नाग की प्रतीकात्मक पूजा करना अधिक उचित माना जाता है।
जीवित सांप के लिए दूध क्यों नुकसानदायक?
वैज्ञानिक दृष्टि से सांप सरीसृप वर्ग के जीव हैं और उनका प्राकृतिक आहार दूध नहीं है। जबरन दूध पिलाने से उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। विशेष रूप से जब दूध या अन्य तरल पदार्थ गलत तरीके से उनके श्वसन तंत्र में चला जाए तो गंभीर समस्या उत्पन्न हो सकती है। इसीलिए विशेषज्ञ जीवित सांप को पकड़कर दूध पिलाने के बजाय उसे उसके प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रखने की सलाह देते हैं।
पूजा का सही तरीका क्या?
नाग पंचमी पर नाग देवता की पूजा के लिए मिट्टी, धातु या अन्य प्रतीकात्मक नाग प्रतिमा का पूजन किया जा सकता है। शिवलिंग पर विधिपूर्वक अभिषेक और नाग देवता का स्मरण भी परंपरा का हिस्सा है। नागों के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का सबसे अच्छा तरीका उनके प्राकृतिक जीवन और सुरक्षा का सम्मान करना है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान शिव अपने गले में नागराज वासुकि को धारण करते हैं, वहीं भगवान विष्णु का संबंध शेषनाग से माना जाता है। इसलिए नाग पंचमी केवल पूजा का पर्व ही नहीं, बल्कि प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति करुणा एवं संरक्षण का संदेश देने वाला पर्व भी है।
संदेश
नाग पंचमी पर आस्था जरूर रखें, लेकिन किसी जीव को कष्ट देकर नहीं। नाग देवता की पूजा करें, जीवित सांप को परेशान न करें और यदि कहीं सांप दिखाई दे तो उसे पकड़ने या दूध पिलाने के बजाय प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की सहायता लें।