19 मार्च से शुरू होगा नव संवत्सर 2083, इस बार 13 महीनों का रहेगा विक्रम संवत; गुरु ग्रह का प्रभाव रहेगा प्रमुख

YC न्यूज़ डेस्क । जहां पूरी दुनिया में नया साल 1 जनवरी को मनाया जाता है, वहीं हिंदू धर्म में नववर्ष की शुरुआत चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से होती है। इस वर्ष 19 मार्च, गुरुवार से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी और इसी दिन से विक्रम संवत 2083 प्रारंभ होगा। धार्मिक और पंचांग की दृष्टि से यह संवत्सर विशेष महत्व का माना जा रहा है, क्योंकि इस बार वर्ष 12 नहीं बल्कि 13 महीनों का होगा।

गुड़ी पड़वा, उगादी और चैत्र नवरात्रि का शुभारंभ

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के ज्योतिषाचार्य प्रो. विनय पांडे के अनुसार, चैत्र शुक्ल प्रतिपदा 19 मार्च को पड़ रही है। इसी दिन देश के विभिन्न हिस्सों में गुड़ी पड़वा और उगादी का पर्व मनाया जाएगा। साथ ही चैत्र नवरात्रि का भी शुभारंभ होगा, जो 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक चलेगी।

क्यों खास है नव संवत्सर 2083?

प्रो. पांडे के मुताबिक, इस वर्ष हिंदू पंचांग में एक अधिक मास जुड़ेगा, जिसके कारण वर्ष 13 महीनों का हो जाएगा। इस अतिरिक्त महीने को अधिक मास, मलमास या पुरुषोत्तम मास कहा जाता है। भारतीय कालगणना पद्धति में महीनों की गणना चंद्रमान से और वर्ष की गणना सौरमान से की जाती है। सौर और चंद्र गणना में सामंजस्य बनाए रखने के लिए लगभग हर तीसरे वर्ष एक अतिरिक्त महीना जोड़ा जाता है। यही कारण है कि नव संवत्सर 2083 धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कब रहेगा अधिक मास?

गोरखपुर के ज्योतिषाचार्य नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ माह में अधिक मास आएगा। यह 17 मई से शुरू होकर 15 जून तक रहेगा। इस कारण वर्ष में दो ज्येष्ठ माह होंगे। प्रारंभिक 15 दिन सामान्य ज्येष्ठ, उसके बाद 30 दिन अधिक ज्येष्ठ मास और अंत के 15 दिन पुनः सामान्य ज्येष्ठ के होंगे। अधिक मास के चलते आगामी व्रत और त्योहारों की तिथियां लगभग 15 से 20 दिन आगे खिसक सकती हैं।

गुरु ग्रह का रहेगा विशेष प्रभाव

ज्योतिषीय दृष्टि से नव संवत्सर 2083 में गुरु (बृहस्पति) ग्रह का प्रभाव प्रमुख रहेगा। नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, गुरु को ज्ञान, धर्म, नीति और विस्तार का कारक ग्रह माना जाता है। ऐसे में इस वर्ष लोगों का रुझान धार्मिक और आध्यात्मिक गतिविधियों की ओर बढ़ सकता है। गुरु के प्रभाव से शिक्षा, न्याय, सलाह-मशविरा और सोच-समझकर निर्णय लेने की प्रवृत्ति को बल मिल सकता है। बड़े फैसलों में धैर्य और संतुलन देखने को मिलेगा। अधिक मास के कारण आत्मचिंतन और आत्मसुधार की प्रवृत्ति भी प्रबल हो सकती है। धार्मिक विद्वानों के अनुसार, नव संवत्सर 2083 न केवल पंचांग की दृष्टि से बल्कि सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत देता है।

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