गरियाबंद, 29 अक्टूबर 2025 | प्रतिनिधि रिपोर्ट
गरियाबंद जिले के बहुचर्चित पत्रकार उमेश कुमार राजपूत हत्याकांड में न्याय की प्रतीक्षा अब भी अधूरी है। घटना को हुए चौदह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन दोषियों को सजा नहीं मिल पाई। इसी निराशा और आक्रोश के बीच अब उमेश राजपूत के परिजन अनिश्चितकालीन धरना-हड़ताल पर बैठने जा रहे हैं।
◆ परिजनों ने जताई नाराज़गी, कहा — “अब और इंतजार नहीं”
परिजनों का कहना है कि 23 जनवरी 2011 को छुरा नगर में उनके घर के भीतर ही उमेश राजपूत की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। स्थानीय पुलिस की जांच वर्षों तक चली, लेकिन कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया। बाद में मामला हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई को सौंपा गया, किंतु एक दशक से अधिक बीतने के बावजूद न्याय की किरण अब तक दिखाई नहीं दी।
◆ “सीबीआई जांच सुस्त, आरोपी खुले घूम रहे”
परिजनों ने आरोप लगाया है कि सीबीआई की जांच अब लगभग ठहर गई है और मुख्य आरोपी आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि जांच प्रक्रिया में तेजी नहीं लाई गई, तो वे गरियाबंद जिला मुख्यालय में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन शुरू करेंगे और राज्य व केंद्र सरकार से सीधे हस्तक्षेप की मांग करेंगे।
◆ पत्रकार संगठन और जनप्रतिनिधियों का समर्थन
स्थानीय पत्रकार संगठनों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने परिजनों के इस निर्णय का समर्थन किया है। उनका कहना है कि —पत्रकार उमेश राजपूत की हत्या केवल एक व्यक्ति पर हमला नहीं, बल्कि अभिव्यक्ति की आज़ादी पर सीधा प्रहार है। उन्होंने चेतावनी दी है कि जब तक पीड़ित परिवार को न्याय नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
◆ निर्भीक पत्रकार थे उमेश राजपूत
उल्लेखनीय है कि उमेश कुमार राजपूत छुरा क्षेत्र के निर्भीक पत्रकार माने जाते थे। वे लगातार भ्रष्टाचार, अवैध खनन और प्रशासनिक लापरवाही जैसे मुद्दों को उजागर करते रहे थे। उनकी हत्या के बाद प्रदेशभर में पत्रकारों और सामाजिक संगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया और विरोध प्रदर्शन किया था।
अब देखना यह होगा कि परिजनों की इस न्याय यात्रा की नई पहल से क्या सरकार और जांच एजेंसियां सक्रिय होती हैं, या यह संघर्ष और लंबा खिंचता है।