
रायपुर, 17 मई 2026। छत्तीसगढ़ में शिक्षा के अधिकार (RTE) के तहत प्रवेश को लेकर चल रहा विवाद अब कुछ हद तक सुलझता नजर आ रहा है। निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने बड़ा फैसला लेते हुए 18 मई से प्रदेशभर के निजी स्कूलों में आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू करने की घोषणा की है। हालांकि संगठन ने साफ किया है कि उनका असहयोग आंदोलन फिलहाल जारी रहेगा। दरअसल, निजी स्कूल संचालकों और सरकार के बीच विभिन्न मांगों को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। इसी के चलते निजी स्कूलों ने इस वर्ष आरटीई के तहत प्रवेश प्रक्रिया रोकने का निर्णय लिया था, जिससे हजारों गरीब और जरूरतमंद परिवारों के सामने बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंता बढ़ गई थी।
अब निजी स्कूल प्रबंधन संघ ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए निर्णय में बदलाव किया है। संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि विद्यार्थियों का भविष्य सबसे महत्वपूर्ण है और किसी भी स्थिति में गरीब बच्चों की शिक्षा प्रभावित नहीं होने दी जाएगी। इसी कारण आरटीई प्रवेश प्रक्रिया को फिर से बहाल किया जा रहा है। हालांकि निजी स्कूल संचालकों ने यह भी स्पष्ट किया है कि सरकार के खिलाफ उनका असहयोग आंदोलन जारी रहेगा। संघ का कहना है कि सरकार को निजी स्कूलों की आर्थिक समस्याओं और लंबित मांगों पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।
निजी स्कूल संघ की प्रमुख मांगों में सरकारी स्कूलों में प्रति विद्यार्थी होने वाले वास्तविक खर्च और निजी स्कूलों को दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि को सार्वजनिक करना शामिल है। संगठन का आरोप है कि वर्तमान में सरकार द्वारा दी जा रही प्रतिपूर्ति राशि वास्तविक खर्च की तुलना में काफी कम है, जिससे निजी स्कूलों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। आरटीई के तहत आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित वर्ग के बच्चों को निजी स्कूलों में निशुल्क शिक्षा का अधिकार दिया जाता है। ऐसे में प्रवेश प्रक्रिया दोबारा शुरू होने से हजारों अभिभावकों और विद्यार्थियों ने राहत की सांस ली है।