रायपुर। कुख्यात गैंगस्टर मयंक सिंह की पुलिस रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद रायपुर पुलिस ने उसे अदालत में पेश किया, जहां न्यायालय ने उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए। अब आरोपी मयंक सिंह 9 जनवरी 2026 तक जेल में न्यायिक हिरासत में रहेगा। कोर्ट के फैसले की जानकारी बचाव पक्ष के वकील दीपांकर बनर्जी ने मीडिया को दी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, चार दिनों तक चली गहन पूछताछ में मयंक सिंह के आपराधिक नेटवर्क से जुड़े कई अहम खुलासे हुए हैं। जांच में सामने आया है कि वह इंटरनेट कॉल और अन्य ऑनलाइन माध्यमों का उपयोग कर धमकी भरे संदेश भेजता था, ताकि उसकी पहचान और लोकेशन ट्रेस न की जा सके। इसके साथ ही उसने अलग-अलग शहरों में होने वाली आपराधिक गतिविधियों के लिए विशेष कोड वर्ड तैयार कर रखे थे, जिनके जरिए वह अपने गुर्गों को निर्देश देता था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ कि मयंक सिंह का नेटवर्क केवल एक राज्य तक सीमित नहीं था, बल्कि झारखंड, छत्तीसगढ़ सहित अन्य राज्यों तक फैला हुआ था। पुलिस के अनुसार, हर शहर और हर टारगेट के लिए अलग-अलग संकेत और कोड निर्धारित थे, जिससे पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों को भ्रमित किया जा सके।
गौरतलब है कि मयंक सिंह को झारखंड की रामगढ़ जेल से ट्रांजिट रिमांड पर रायपुर लाया गया था। मयंक सिंह मूल रूप से राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के घड़साना क्षेत्र का निवासी है। ऐसे में यह सवाल भी जांच के दायरे में है कि वह अपने गृह राज्य से करीब 1700 किलोमीटर दूर झारखंड और छत्तीसगढ़ में इतना मजबूत आपराधिक नेटवर्क कैसे स्थापित कर पाया। पुलिस जांच में मयंक सिंह के तार कुख्यात लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जुड़े होने की बात भी सामने आई है। पुलिस के अनुसार, भौगोलिक और सामाजिक नजदीकी के चलते मयंक सिंह की लॉरेंस बिश्नोई गैंग में एंट्री आसान हुई और इसी नेटवर्क के सहारे उसने आपराधिक दुनिया में अपनी पहचान बनाई।
रायपुर पुलिस ने बताया कि मयंक सिंह से मिली जानकारी के आधार पर उसके नेटवर्क, फंडिंग और संपर्कों को लेकर आगे की जांच जारी है। साथ ही यह भी पड़ताल की जा रही है कि छत्तीसगढ़ और आसपास के राज्यों में हुई किन-किन आपराधिक वारदातों में उसकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही है।