अब स्लीपर कोच में भी मिलेगा ‘बेडरोल’ का आराम : 6 अप्रैल से दुर्ग की 10 ट्रेनों में सुविधा शुरू, ₹70 में चादर-तकिया

रायपुर। स्लीपर कोच में सफर करने वाले यात्रियों के लिए बड़ी राहत की खबर है। भारतीय रेलवे के रायपुर रेलवे मंडल ने 6 अप्रैल से स्लीपर कोच में बेडरोल सुविधा शुरू करने का फैसला लिया है। इस सुविधा के तहत यात्रियों को अब लंबी दूरी के सफर में चादर और तकिया उपलब्ध कराया जाएगा। रेलवे के अनुसार, इस योजना की शुरुआत दुर्ग से चलने वाली 10 प्रमुख ट्रेनों में की जाएगी। पहले चरण में दुर्ग-अंबिकापुर और संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में 6 अप्रैल से यह सुविधा लागू होगी, जबकि 10 अप्रैल तक अन्य ट्रेनों में भी इसे शुरू कर दिया जाएगा।

₹70 में मिलेगा पूरा बेडरोल पैक
इस सुविधा के लिए यात्रियों को ₹70 अतिरिक्त शुल्क देना होगा। इसके बदले उन्हें 2 चादर, 1 तकिया और 1 कवर उपलब्ध कराया जाएगा। अब तक स्लीपर कोच में यह सुविधा नहीं थी, जिससे यात्रियों को खुद ही बिस्तर लेकर यात्रा करनी पड़ती थी।

PNR के आधार पर मिलेगा बेडरोल
रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, बेडरोल देने से पहले एजेंसी यात्री का PNR और बर्थ नंबर दर्ज करेगी। इसके बाद ही सामग्री दी जाएगी, जिससे वितरण में पारदर्शिता बनी रहे। रेलवे ने बेडरोल के स्टोरेज के लिए हर ट्रेन में 2 बर्थ ठेका एजेंसी को देने का निर्णय लिया है। एजेंसी ने इसके लिए S-3 या S-4 कोच में जगह की मांग की है।

इन ट्रेनों में शुरू होगी सुविधा
दुर्ग से चलने वाली कई प्रमुख ट्रेनों जैसे दुर्ग-निजामुद्दीन संपर्क क्रांति, दुर्ग-अंबिकापुर, दुर्ग-अजमेर, दुर्ग-भोपाल अमरकंटक और दुर्ग-नौतनवा एक्सप्रेस समेत कुल 10 ट्रेनों में इस सुविधा को लागू किया जा रहा है।

रेलवे के सामने रखरखाव और सुरक्षा की चुनौती
हालांकि, इस सुविधा के साथ रेलवे के सामने नई चुनौतियां भी खड़ी हो गई हैं। बेडरोल की सफाई, रखरखाव और चोरी रोकना बड़ी जिम्मेदारी होगी। वर्तमान में एसी कोच में भी एक अटेंडर के जिम्मे दो कोच होते हैं, जिससे निगरानी मुश्किल हो जाती है। रात के समय स्टेशनों पर यात्रियों के उतरने-चढ़ने के दौरान बेडरोल चोरी की आशंका भी बनी रहती है। ऐसे में अतिरिक्त स्टाफ की जरूरत पड़ सकती है।

अधिकारियों ने दी जानकारी
सीनियर डीसीएम ने बताया कि बेडरोल सुविधा के लिए एजेंसी नियुक्त कर दी गई है और इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। शुरुआत में कुछ ट्रेनों में लागू कर बाद में सभी ट्रेनों तक विस्तार किया जाएगा।

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