नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करने दुर्ग में एक दिवसीय DRG बैठक

नई शिक्षा नीति के अनुरूप प्रारंभिक बाल शिक्षा को मजबूत करने दुर्ग में एक दिवसीय DRG बैठक

दुर्ग, 17 नवम्बर 2025। नई शिक्षा नीति के अंतर्गत प्रारंभिक बाल शिक्षा को सुदृढ़ बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए राज्य शैक्षिक अनुसंधान संस्था और अह्वान ट्रस्ट द्वारा संयुक्त रूप से संचालित दुर्ग जिले की 112 बालवाड़ियों के प्रभावी संचालन पर केंद्रित जिला स्तरीय DRG (जिला संसाधन समूह) की एक दिवसीय बैठक आज सम्पन्न हुई। बैठक का आयोजन जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद मिश्रा तथा जिला मिशन समन्वयक विनोद सिन्हा के मार्गदर्शन में किया गया। बैठक का सफल नेतृत्व एपीसी शशिभूषण शर्मा और श्रवण सिन्हा ने किया।

बैठक का मुख्य उद्देश्य ECCE–FLN और प्रोजेक्ट “बुनियाद” के प्रभावी क्रियान्वयन में जिला संसाधन समूह की भूमिका को मजबूत करना था। इसमें प्रारंभिक कक्षा प्रक्रियाओं की गुणवत्ता बढ़ाने, गतिविधि-आधारित शिक्षण को प्रोत्साहित करने और सीखने के प्रतिफल सुधारने जैसी महत्वपूर्ण रणनीतियों पर विस्तृत चर्चा हुई। बैठक में यह स्वीकार किया गया कि DRG जिले में चल रहे ECCE–FLN प्रयासों की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी है, और इसी समूह के माध्यम से प्रशिक्षण, निगरानी और कक्षा-अवलोकन जैसी प्रक्रियाएँ जमीनी स्तर पर प्रभावी रूप से लागू होती हैं।

नेतृत्वकर्ताओं ने बालवाड़ियों में गुणवत्तापूर्ण कक्षा-अवलोकन, उद्देश्यपूर्ण फीडबैक, ध्वनि–अक्षर संबंध, सीखने के वातावरण के सुदृढ़ीकरण तथा शिक्षक–अभिभावक समन्वय जैसे बिंदुओं पर विशेष जोर दिया। निर्णय लिया गया कि आगामी समय में DRG सदस्य नियमित रूप से बालवाड़ी शिक्षकों को कक्षा में सहयोग प्रदान करेंगे, योजना निर्माण में मार्गदर्शन देंगे तथा ब्लॉक एवं जिला स्तर की समीक्षाओं में डेटा-आधारित सुझाव प्रस्तुत करेंगे। इसके साथ ही मॉडल बालवाड़ियों को Learning Hubs के रूप में उपयोग कर उत्कृष्ट शिक्षण प्रथाओं का आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा।

बैठक में अभिभावक सहभागिता को भी प्रारंभिक शिक्षा का महत्वपूर्ण घटक बताते हुए कहा गया कि PTMs, समुदाय बैठकें, व्हाट्सऐप समूह और विभिन्न डिजिटल learning apps के माध्यम से अभिभावकों की भागीदारी बढ़ाने से बच्चों की सीखने की गति में उल्लेखनीय सुधार संभव है। शिक्षकों, अभिभावकों और समुदाय के बीच सामंजस्यपूर्ण संबंध को ECCE और FLN की सफलता के लिए अनिवार्य बताया गया।

इस अवसर पर एपीसी सीता अग्रवाल, संजय राजपूत, तथा अह्वान ट्रस्ट के जिला समन्वयक तुकाराम टेखरे, लक्ष्मण मालवीय और प्रदीप शर्मा मौजूद रहे। जिले के 50 से अधिक DRG सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता दर्ज कराते हुए अपने अनुभव साझा किए और कार्यक्रम की सफलता के प्रति दृढ़ संकल्प व्यक्त किया।

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