YC न्यूज़ डेस्क | ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता के बाद देश की सुरक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी अपने चरम पर है। इस मुद्दे पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (BJP) के बीच सोशल मीडिया पर तीखा पोस्टर वॉर शुरू हो गया है, जिसमें अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प से लेकर पाकिस्तान के आर्मी चीफ तक को प्रतीकात्मक रूप से घसीटा जा रहा है।
मंगलवार देर रात कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधते हुए एक पोस्टर जारी किया, जिसमें ट्रम्प और मोदी के बीच काल्पनिक बातचीत दिखाई गई। पोस्टर में ट्रम्प मोदी से कहते दिख रहे हैं—“सरेंडर हो जाओ।” जवाब में मोदी कहते हैं—“जी हजूर।” कांग्रेस ने इसके साथ तंज कसा—“नरेंदर, सरेंडर नहीं होना था!”
इस पर पलटवार करते हुए भाजपा नेता और असम सरकार में मंत्री अशोक सिंघल ने रात 11 बजे X (पूर्व ट्विटर) पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी का पोस्टर साझा किया। इसमें राहुल को पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर के साथ दिखाया गया, जहां मुनीर उन्हें निशान-ए-पाकिस्तान पहना रहे हैं। पोस्टर पर लिखा था—“वन एजेंडा, वन ड्रीम” यानी एक एजेंडा, एक सपना।
इससे पहले 20 मई को भी भाजपा नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी का चेहरा पाक आर्मी चीफ के साथ मिक्स करते हुए पोस्टर जारी किया था, जिसमें उन्हें “नया मीर जाफर” बताया गया था। जवाब में कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर को “जयचंद” करार देते हुए पोस्टर प्रकाशित किया।
राहुल गांधी के आरोप: पीएम ने ट्रम्प के एक फोन पर ‘सरेंडर’ किया
मंगलवार को भोपाल में एक जनसभा को संबोधित करते हुए राहुल गांधी ने सीधे प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा, “ट्रम्प का एक फोन आया और नरेंद्र मोदी जी तुरंत सरेंडर हो गए। यह BJP-RSS का चरित्र है। इतिहास गवाह है, कांग्रेस ने कभी झुकना नहीं सीखा। 1971 में जब अमेरिका ने धमकी दी थी, तब इंदिरा गांधी डटी रहीं और पाकिस्तान को तोड़ दिया।”
BJP का पलटवार: राहुल पाकिस्तान के एजेंडे पर काम कर रहे
भाजपा नेता अमित मालवीय ने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे बार-बार भारतीय वायुसेना की क्षति का ज़िक्र कर दुश्मनों को खुश करने का काम कर रहे हैं, जबकि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और पाकिस्तानी ठिकानों को तबाह करने की उपलब्धियों पर एक शब्द भी नहीं कहा।
उन्होंने कहा,
“राहुल गांधी ने पीएम को बधाई नहीं दी, बल्कि वही सवाल पूछे जो पाकिस्तान पूछता है—हमने कितने एयरक्राफ्ट खोए?”
इतिहास की गूंज: मीर जाफर और जयचंद की पुनरावृत्ति?
राजनीतिक पोस्टरों में लगातार “मीर जाफर” और “जयचंद” जैसे ऐतिहासिक विश्वासघात के प्रतीकों का इस्तेमाल हो रहा है।
मीर जाफर, जिसने 1757 में प्लासी की लड़ाई में अंग्रेजों से मिलकर सिराजुद्दौला को हराया था, भारतीय राजनीति में गद्दारी का प्रतीक माना जाता है।
जयचंद, जिसे चंद्रगुप्त के खिलाफ मोहम्मद गौरी का साथ देने के लिए जाना जाता है, भी इसी संदर्भ में बार-बार उभारा जा रहा है।
निष्कर्ष: ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से जुड़ी देश की रणनीतिक सफलता के बावजूद, सियासी विमर्श अब राष्ट्रीय सुरक्षा से हटकर पोस्टर और प्रतीकात्मक हमलों में तब्दील हो चुका है। कांग्रेस और भाजपा दोनों ही एक-दूसरे को देशद्रोह और विदेशी एजेंडे से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। जनता इस पोस्टर युद्ध में सच्चाई तलाश रही है, और सवाल अब ये है कि क्या सियासत देशहित से ऊपर होती जा रही है?