शीतकालीन सत्र में नेशनल हेराल्ड मामले पर विपक्ष का हंगामा,कार्यवाही दो बार स्थगित, भूपेश का आरोप– केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग, चंद्राकर बोले– दावे निराधार

रायपुर | विधानसभा के शीतकालीन सत्र के आखिरी दिन की शुरुआत नेशनल हेराल्ड मामले को लेकर भारी हंगामे के साथ हुई। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही कांग्रेस विधायकों ने “सत्यमेव जयते” लिखी तख्तियां हाथ में लेकर नारेबाजी शुरू कर दी। स्पीकर ने तख्तियों के साथ सदन में बैठने की अनुमति नहीं दी, इसके बावजूद विपक्ष का प्रदर्शन जारी रहा। हालात बिगड़ते देख सदन की कार्यवाही दो बार 10-10 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी।
हंगामे के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए। नेता प्रतिपक्ष भूपेश बघेल ने केंद्र सरकार पर केंद्रीय जांच एजेंसियों के दुरुपयोग का आरोप लगाते हुए कहा कि विपक्षी नेताओं को राजनीतिक प्रतिशोध के तहत निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया। वहीं अजय चंद्राकर ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि विपक्ष के सभी दावे निराधार हैं और जांच एजेंसियां कानून के तहत स्वतंत्र रूप से काम कर रही हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस तथ्यों के बजाय केवल भ्रम फैलाने की राजनीति कर रही है। विपक्ष ने जांच एजेंसियों के कथित दुरुपयोग को लेकर स्थगन प्रस्ताव भी पेश किया, जिसे आसंदी ने अस्वीकार कर दिया। इसके बाद सदन में माहौल और गरमा गया। कांग्रेस विधायकों ने “सत्यमेव जयते” के नारे लगाए, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से “वंदे मातरम” के नारे लगाकर जवाब दिया गया।
स्पीकर ने जताई नाराजगी
प्रश्नकाल की कार्यवाही बाधित होने पर स्पीकर डॉ. रमन सिंह ने विपक्ष के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि लोकहित से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा के समय सदन को बाधित करना निंदनीय है। स्पीकर ने यह भी कहा कि विपक्षी सदस्य संसदीय परंपराओं से भली-भांति परिचित हैं, इसके बावजूद इस तरह का आचरण अमर्यादित है। भविष्य में ऐसा न हो, यह सदस्यों के विवेक पर छोड़ा गया।
35 हजार करोड़ का सप्लीमेंट्री बजट पेश
शीतकालीन सत्र के तीसरे दिन वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में 35,000 करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट पेश किया। वित्तीय वर्ष समाप्त होने से तीन महीने पहले लाए गए इस बड़े बजट को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस हुई। वित्त मंत्री ने कहा कि यह बजट प्रदेश के विकास को नई गति देगा। विधायक अजय चंद्राकर ने इसे छत्तीसगढ़ के इतिहास का सबसे बड़ा सप्लीमेंट्री बजट बताया और कहा कि राजस्व व्यय बढ़ाने की शुरुआत पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार ने की थी।वहीं कांग्रेस विधायक राघवेंद्र सिंह ने सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि राज्य लगातार कर्ज में डूबता जा रहा है और ऐसे में वित्तीय वर्ष के अंतिम तीन महीनों में 35 हजार करोड़ रुपए का अनुपूरक बजट लाना समझ से परे है। उन्होंने आरोप लगाया कि बजट में कोई स्पष्ट विजन नहीं दिखता। राघवेंद्र सिंह ने कहा कि महिलाओं को महतारी वंदन योजना के तहत मिलने वाली राशि बिजली बिल के नाम पर वसूली जा रही है। सरकार का फोकस विकास कार्यों से ज्यादा इवेंट मैनेजमेंट पर है। उन्होंने भर्ती, नियमितीकरण, किसानों को समय पर भुगतान और बुनियादी सुविधाओं से जुड़े वादों के अधूरे रहने का मुद्दा भी उठाया। कुल मिलाकर शीतकालीन सत्र का अंतिम दिन हंगामे, आरोप-प्रत्यारोप और तीखी बहसों के बीच संपन्न हुआ, जिससे सदन का माहौल लगातार गर्म बना रहा।

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