पाटन कोर्ट का फैसला: पूजा निर्मलकर हत्याकांड में दोनों दोषियों को उम्रकैद, 1638 दिन बाद आया निर्णय

पाटन कोर्ट का फैसला: पूजा निर्मलकर हत्याकांड में दोनों दोषियों को उम्रकैद, 1638 दिन बाद आया निर्णय

पाटन। दुर्ग जिले के भिलाई-3 के गांधीनगर में हुए चर्चित पूजा निर्मलकर हत्याकांड में पाटन के अपर सत्र न्यायालय ने दोनों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अपर सत्र न्यायाधीश दुलार सिंह निर्मलकर ने शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 को दीपक उर्फ अविनाश झा और मायाशंकर तिवारी उर्फ राजू उर्फ मिथ्थैया को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना। न्यायालय ने दोनों दोषियों को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 सहपठित धारा 34 के तहत आजीवन कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड तथा धारा 201 के तहत 7 वर्ष के सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए अर्थदंड की सजा सुनाई है। अर्थदंड नहीं देने की स्थिति में अतिरिक्त कारावास भी भुगतना होगा। दोनों सजाएं समानांतर रूप से चलेंगी।

शराब पीने के दौरान हुआ विवाद, फिर पूजा की हत्या

अभियोजन के अनुसार, 23 फरवरी 2022 को पूजा निर्मलकर भिलाई-3 के गांधीनगर स्थित दीपक के किराए के मकान में थी। इसी दौरान मायाशंकर तिवारी भी वहां पहुंचा। दोनों आरोपियों ने शराब पी और डांस किया। इसी दौरान पूजा और मायाशंकर के बीच कथित आपत्तिजनक व्यवहार को लेकर दीपक नाराज हो गया। आरोप है कि विवाद बढ़ने पर दीपक ने मायाशंकर पर शराब की बोतल से हमला किया, जिसके बाद मायाशंकर वहां से भाग गया। इसके बाद दीपक ने पूजा के साथ मारपीट की। अभियोजन के मुताबिक, दोनों आरोपियों ने पूजा को पकड़कर उसका सिर दीवार से टकराया और फिर टूटे कांच से उसके सिर और शरीर पर कई वार किए। गंभीर चोटों के कारण पूजा की मौत हो गई।

पूरे दिन कमरे में पड़ा रहा शव, रात में खंडहर में छिपाया

हत्या के बाद आरोपियों ने शव को तत्काल बाहर नहीं निकाला। पुलिस जांच के मुताबिक, शव को पूरे दिन कमरे में रखा गया। इसके बाद 24 फरवरी की देर रात शव को चादर में लपेटकर बाइक से जोरातराई की पुरानी देशी शराब भट्टी के पास स्थित एक खंडहर में ले जाकर छिपा दिया गया। 25 फरवरी 2022 को हरिश नायक ने खंडहर में शव पड़े होने की सूचना उतई पुलिस को दी। पुलिस ने मर्ग क्रमांक 09/2022 दर्ज कर जांच शुरू की। मृतका की पहचान उसकी मां नीरू निर्मलकर और बहन नेहा सोना ने पूजा के रूप में की।

मां की शिकायत के बाद दर्ज हुआ हत्या का मामला

शव की पहचान होने के बाद पूजा की मां नीरू निर्मलकर की रिपोर्ट पर पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज किया। जांच में सामने आया कि पूजा अपने पति से अलग होकर आरोपी दीपक के साथ गांधीनगर में किराए के मकान में रह रही थी। दोनों के बीच अक्सर विवाद होने की जानकारी भी जांच के दौरान सामने आई। पुलिस ने दीपक को गिरफ्तार कर पूछताछ की, जिसके बाद मामले में मायाशंकर तिवारी की भूमिका भी सामने आई। दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने गवाहों और दस्तावेजी साक्ष्य के आधार पर अपना पक्ष रखा।

बचाव पक्ष ने सजा में नरमी की मांग की

सजा पर बहस के दौरान बचाव पक्ष ने दोनों आरोपियों का पहला अपराध होने और लंबे समय से न्यायिक अभिरक्षा में रहने का हवाला देते हुए सजा में नरमी की मांग की। वहीं अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कड़ी सजा दिए जाने की मांग की। न्यायालय ने दोनों पक्षों की दलीलों और उपलब्ध साक्ष्यों का परीक्षण करने के बाद दोनों आरोपियों को हत्या और साक्ष्य मिटाने का दोषी माना।

उम्रकैद के साथ कुल 6 हजार रुपए अर्थदंड

धारा 302/34 के तहत दोनों आरोपियों को आजीवन कारावास और 5 हजार रुपए अर्थदंड की सजा दी गई है। अर्थदंड नहीं देने पर 5 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। वहीं धारा 201 के तहत 7 वर्ष का सश्रम कारावास और 1 हजार रुपए अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड नहीं देने पर 3 माह का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा। अदालत ने दोनों सजाओं को समानांतर चलाने का आदेश दिया है।

1638 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहे दोनों आरोपी

न्यायालय के निर्णय के अनुसार, दोनों आरोपी 25 फरवरी 2022 से 21 अगस्त 2026 तक कुल 1638 दिन, यानी करीब 4 वर्ष 5 माह 27 दिन न्यायिक अभिरक्षा में रहे। फैसला सुनाए जाने के बाद दोनों के सजा वारंट तैयार कर उन्हें केंद्रीय कारागार दुर्ग भेजने का आदेश दिया गया।

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