PM आवास डिबेट के बाद ‘मीम वॉर’: भाजपा-कांग्रेस सोशल मीडिया पर आमने-सामने, दोनों ने एक-दूसरे के दावों पर साधा निशाना

रायपुर। प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के बीच रायपुर प्रेस क्लब में हुई खुली बहस खत्म होने के बाद भी सियासी घमासान थमा नहीं है। करीब 80 मिनट की बहस में दोनों नेताओं ने आवासों की स्वीकृति, निर्माण और केंद्र-राज्य की भूमिका को लेकर अपने-अपने आंकड़े रखे थे। अब यही बहस सोशल मीडिया तक पहुंच गई है, जहां भाजपा और कांग्रेस ने एक-दूसरे पर मीम, पोस्ट और कार्टून के जरिए निशाना साधना शुरू कर दिया है। कांग्रेस ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा को लेकर मीम और पोस्ट साझा किए, जबकि भाजपा ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बयानों और पीएम आवास से जुड़े दावों को निशाने पर लिया। दोनों दलों के समर्थक भी इन पोस्ट को सोशल मीडिया पर आगे बढ़ा रहे हैं।

डिबेट के बाद डिजिटल प्लेटफॉर्म बना नया अखाड़ा

रायपुर प्रेस क्लब में मंगलवार को हुई बहस के दौरान दोनों नेताओं के बीच पीएम आवास योजना के आंकड़ों को लेकर कई मुद्दों पर सवाल-जवाब हुए। बहस में अलग-अलग वर्षों में स्वीकृत आवास, पूरे हुए मकान, केंद्र से मिली मंजूरी और राज्य सरकार के फैसलों का मुद्दा उठा। बहस खत्म होने के बाद भाजपा और कांग्रेस ने अपने-अपने सोशल मीडिया हैंडल से नेताओं के बयानों को आधार बनाकर पोस्ट जारी किए। इसके बाद समर्थकों के बीच भी मीम और कार्टून पोस्ट करने का सिलसिला शुरू हो गया।

भाजपा ने बघेल के आंकड़ों पर उठाए सवाल

भाजपा छत्तीसगढ़ की ओर से सोशल मीडिया पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को निशाना बनाते हुए पोस्ट किए गए। एक पोस्ट में लिखा गया कि “भ्रष्टाचार, धांधली और घूसखोरी के अलावा थोड़ा गणित भी सीखना था भूपेश जी।” एक अन्य पोस्ट में भाजपा ने 18 लाख से अधिक परिवारों को आवास से वंचित रखने का आरोप लगाते हुए बघेल से माफी मांगने की बात कही। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए भूपेश बघेल के दावों पर सवाल उठाए। उन्होंने पीएम आवास योजना के आंकड़ों को लेकर अपनी सरकार के दावे सामने रखे और कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में आवास निर्माण को लेकर सवाल किया।

कांग्रेस ने ‘18 लाख आवास’ के दावे पर किया पलटवार

कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने भाजपा और विजय शर्मा के बयानों पर पलटवार करते हुए सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी किए। कांग्रेस ने लिखा कि “18 लाख आवास का ढोल पीटते रहे, अब विजय शर्मा ने ही भाजपा के झूठ की हवा निकाल दी।” एक अन्य पोस्ट में कांग्रेस ने कहा कि सरकार के पहले के दावों और बहस के दौरान सामने आए आंकड़ों में अंतर है। पार्टी ने आवासों की स्वीकृति और वास्तविक निर्माण की स्थिति पर सरकार से जवाब मांगा।

बघेल ने भी सोशल मीडिया पर साधा निशाना

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बहस के बाद सोशल मीडिया पर विजय शर्मा पर निशाना साधते हुए लिखा- “अगली बार किसी समझदार को भेजना, ‘छोटा रिचार्ज’ रील के लिए ही ठीक है।” बघेल ने अपने पोस्ट में दावा किया कि भाजपा सरकार ने 2023 में 18 लाख नए पीएम आवासों का जो दावा किया था, वह सही नहीं है। उन्होंने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से अलग-अलग मौकों पर किए गए आवास संबंधी दावों का भी जिक्र किया।

आवास के आंकड़ों पर हुई थी सीधी बहस

रायपुर प्रेस क्लब में हुई बहस में दोनों नेताओं ने अलग-अलग आंकड़े पेश किए थे। रिपोर्टों के मुताबिक चर्चा का मुख्य केंद्र यह रहा कि कितने आवास स्वीकृत हुए, कितने पूरे हुए और अलग-अलग चरणों में केंद्र से मिली स्वीकृतियों को किस तरह गिना जाना चाहिए। बहस के दौरान कोरोना काल, PM आवास पोर्टल, पूर्ववर्ती सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत आवास और मौजूदा सरकार के दौरान बने मकानों के आंकड़े भी चर्चा में आए। दोनों नेताओं ने एक-दूसरे के आंकड़ों और दावों पर सवाल उठाए।

प्रेस क्लब के बाहर भी भिड़े थे समर्थक

डिबेट के पहले और बाद में रायपुर प्रेस क्लब के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच नारेबाजी और विवाद की स्थिति बनी थी। पुलिस ने हस्तक्षेप कर दोनों पक्षों को अलग किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार कार्यक्रम के दौरान भी राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा।

अब सोशल मीडिया पर जारी है आंकड़ों की लड़ाई

पीएम आवास योजना को लेकर शुरू हुई राजनीतिक बहस अब दो स्तरों पर चल रही है। एक तरफ दोनों दल योजना के आंकड़ों को लेकर अपनी-अपनी व्याख्या सामने रख रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ सोशल मीडिया पर मीम, कार्टून और छोटे वीडियो के जरिए एक-दूसरे के दावों को निशाना बनाया जा रहा है।

फिलहाल दोनों दलों के सोशल मीडिया पोस्ट में अपने-अपने दावे प्रमुखता से सामने रखे जा रहे हैं। पीएम आवास योजना के Target, Sanction और Completed Houses जैसे अलग-अलग आंकड़ों को एक साथ देखने पर ही पूरे विवाद की तथ्यात्मक तस्वीर स्पष्ट हो सकती है। उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों और अलग-अलग स्वीकृति चरणों में अंतर होने के कारण राजनीतिक पोस्ट में किए जा रहे हर दावे को उसी संदर्भ में देखना जरूरी है।

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