“पुलिस वसूली एजेंट नहीं बन सकती” : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 53 करोड़ होल्ड करने का आदेश रद्द

“पुलिस वसूली एजेंट नहीं बन सकती” : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की सख्त टिप्पणी, 53 करोड़ होल्ड करने का आदेश रद्द

एनबीएफसी कंपनी के बैंक खाते पर पुलिस की कार्रवाई को हाईकोर्ट ने बताया कानून के दायरे से बाहर, BNSS के पालन पर दिया जोर
बिलासपुर, 12 जून 2026। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी करते हुए स्पष्ट कहा है कि पुलिस किसी भी परिस्थिति में निजी वसूली एजेंट की भूमिका नहीं निभा सकती। मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा और न्यायमूर्ति रवींद्र कुमार अग्रवाल की खंडपीठ ने एक एनबीएफसी कंपनी के बैंक खाते में राशि होल्ड करने के पुलिस आदेश को निरस्त कर दिया।

मामला नई दिल्ली स्थित ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड से जुड़ा है, जो उद्योगों और लघु व्यवसायों को ऋण उपलब्ध कराती है। कंपनी का कोटक महिंद्रा बैंक की रायपुर शाखा में खाता संचालित है, जिसमें देशभर के ग्राहकों की ईएमआई के रूप में प्रतिदिन करोड़ों रुपये जमा होते हैं।
जानकारी के अनुसार ऑक्सीजो फाइनेंशियल सर्विसेज ने रायपुर की श्रीजीकृपा प्रोजेक्ट लिमिटेड को कच्चा माल खरीदने के लिए लगभग 10 करोड़ रुपये की ऋण सुविधा प्रदान की थी। बाद में माल आपूर्ति को लेकर उत्पन्न विवाद के चलते मंदिर हसौद थाने में धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया गया।

जांच के दौरान पुलिस ने कंपनी के बैंक खाते में जमा 53.47 करोड़ रुपये की राशि को होल्ड कर दिया। बाद में यह राशि घटाकर 43.38 लाख रुपये रखने का आदेश जारी किया गया। इस कार्रवाई को कंपनी ने हाईकोर्ट में चुनौती दी।
कंपनी की ओर से दायर याचिका में कहा गया कि वह न तो एफआईआर में आरोपी है और न ही कथित धोखाधड़ी से उसका कोई प्रत्यक्ष संबंध है। इसके बावजूद पुलिस ने बिना वैधानिक आधार के बैंक खाते पर रोक लगाकर कंपनी के नियमित कारोबार को प्रभावित किया।याचिकाकर्ता की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिन्हा और विवेक चोपड़ा ने अदालत में पक्ष रखते हुए तर्क दिया कि पुलिस ने एक व्यावसायिक विवाद में दबाव बनाने के उद्देश्य से कार्रवाई की, जिससे कंपनी के संवैधानिक अधिकार प्रभावित हुए।

सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 के प्रावधानों का पालन किए बिना किसी बैंक खाते को होल्ड करना कानून सम्मत नहीं है। अदालत ने स्पष्ट किया कि पुलिस की भूमिका केवल अपराध की जांच तक सीमित है और वह किसी पक्ष के लिए वसूली एजेंसी के रूप में कार्य नहीं कर सकती। खंडपीठ ने पुलिस द्वारा जारी खाते को होल्ड करने के आदेश को रद्द करते हुए कहा कि जांच एजेंसियों को अपने अधिकारों का प्रयोग कानून की सीमाओं के भीतर रहकर करना होगा। न्यायालय की इस टिप्पणी को पुलिस की वैधानिक शक्तियों और उनकी सीमाओं को स्पष्ट करने वाला महत्वपूर्ण फैसला माना जा रहा है।

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