धान बिक्री के आंकड़ों पर सियासी संग्राम: बीजेपी बोली- विष्णु के सुशासन में भूपेश भी हुए मालामाल,भूपेश बघेल का पलटवार, बोले– किसान हैं तो ‘माल’ उगाया और बेचा

रायपुर।छत्तीसगढ़ में धान खरीदी को लेकर भाजपा और कांग्रेस के बीच सोशल मीडिया पर तीखी नोकझोंक जारी है। भाजपा रायगढ़ के आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से जारी एक पोस्ट में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और उनके परिवार द्वारा बेचे गए धान का विवरण साझा करते हुए लिखा गया, “विष्णु के सुशासन में भूपेश भी हुए मालामाल।” पोस्टर में भूपेश बघेल की तस्वीर के साथ उनके परिवार के चार सदस्यों के नाम और धान बिक्री से जुड़ी मात्रा व राशि का ब्यौरा दिया गया है। इसके बाद सियासी माहौल गर्मा गया और कांग्रेस की ओर से तीखी प्रतिक्रिया सामने आई।

भाजपा ने जारी किए ये आंकड़े

भाजपा द्वारा सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार—

  • भूपेश बघेल – 925.2 क्विंटल धान, राशि 21,91,998.8 रुपए, अंतर राशि 6,76,321.2 रुपए
  • चैतन्य बघेल – 87.6 क्विंटल, राशि 2,07,524.4 रुपए, अंतर राशि 64,035.6 रुपए
  • दीप्ति बघेल – 194.4 क्विंटल, राशि 4,60,533.6 रुपए, अंतर राशि 1,42,106.4 रुपए
  • मुक्तेश्वरी बघेल – 61.2 क्विंटल, राशि 1,44,982.8 रुपए, अंतर राशि 44,737.2 रुपए

पोस्ट में यह भी टिप्पणी की गई कि “व्यवस्था को बदहाल कहने वालों ने भी खाई मलाई।”

भूपेश बघेल का जवाब

पोस्ट के बाद पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक्स पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “हां जी, हुए मालामाल! किसान हैं तो माल उगाया और बेचा तो माल आया।” उन्होंने कहा कि किसान यदि अपनी मेहनत की फसल बेचकर पैसा कमाते हैं तो इसमें गलत क्या है। बघेल ने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार ने किसानों को पर्याप्त खाद और बिजली उपलब्ध नहीं कराई, इसके बावजूद उन्होंने खेती जारी रखी और धान उत्पादन किया। उन्होंने अपनी सरकार के कार्यकाल का जिक्र करते हुए कहा कि उनकी प्राथमिकता किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना था और हर किसान तक भुगतान सुनिश्चित किया गया।

भाजपा पर पलटवार

भूपेश बघेल ने भाजपा के 15 साल के शासनकाल का हवाला देते हुए कहा कि उस दौर में किसान आत्महत्या जैसी घटनाएं सामने आती थीं। उन्होंने प्रधानमंत्री द्वारा वर्ष 2022 तक किसानों की आय दोगुनी करने के वादे पर भी सवाल उठाए। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि किसानों को मिलने वाली मेहनत की कमाई को “माल” कहकर संबोधित करना गलत है। यह किसी घोटाले की रकम नहीं, बल्कि परिश्रम से अर्जित आय है

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