रायपुर। छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाला मामले में पूर्व आबकारी मंत्री एवं वरिष्ठ कांग्रेस नेता कवासी लखमा की रिहाई के साथ ही प्रदेश की राजनीति में बयानबाज़ी तेज हो गई है। जहां एक ओर कांग्रेस के बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी ने कई सवाल खड़े किए हैं, वहीं भारतीय जनता पार्टी ने इस मुद्दे को लेकर कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है।
मंगलवार को कवासी लखमा को रायपुर सेंट्रल जेल से रिहा किया गया। जेल परिसर के बाहर उनके समर्थकों और परिजनों में उत्साह देखने को मिला। इस दौरान भानुप्रतापपुर विधायक सावित्री मांडवी, पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, कांग्रेस कार्यकर्ता और परिवार के सदस्य मौजूद रहे। समर्थकों ने फूल-मालाओं से लखमा का स्वागत किया और नारेबाजी भी की, लेकिन कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व का कोई बड़ा चेहरा मौके पर नजर नहीं आया।
कांग्रेस सूत्रों के अनुसार, प्रदेश अध्यक्ष दीपक बैज रिहाई के समय रायपुर में उपस्थित नहीं थे और वे बालोद होते हुए बस्तर दौरे पर रवाना हो चुके थे। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत पहले से निर्धारित कार्यक्रमों के चलते अपने गृह क्षेत्र सक्ती में थे। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल दिल्ली एवं अमृतसर प्रवास पर होने के कारण रायपुर नहीं पहुंच सके।कांग्रेस नेताओं की गैरमौजूदगी को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया है। भाजपा प्रदेश प्रवक्ता अमित चिमनानी ने बयान जारी कर कहा कि जब बिट्टू बघेल की जेल से रिहाई हुई थी, तब कांग्रेस के बड़े नेता और स्वयं भूपेश बघेल उन्हें लेने पहुंचे थे और माहौल उत्सव जैसा बना दिया गया था।
अमित चिमनानी ने सवाल उठाते हुए कहा कि आज कवासी लखमा की रिहाई के समय कांग्रेस का कोई भी बड़ा नेता जेल पहुंचना जरूरी नहीं समझा। उन्होंने तंज कसते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस ने एक आदिवासी नेता को मोहरे की तरह इस्तेमाल किया और संकट के समय उनसे दूरी बना ली। भाजपा ने इसे कांग्रेस की कथनी और करनी में अंतर बताया है। वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वरिष्ठ नेताओं की अनुपस्थिति का कारण पूर्व निर्धारित कार्यक्रम थे और इसे राजनीतिक रंग देना उचित नहीं है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, कवासी लखमा की रिहाई एक कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा है और कांग्रेस नेतृत्व आगे भी उनके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उल्लेखनीय है कि शराब घोटाला मामला लंबे समय से छत्तीसगढ़ की राजनीति के केंद्र में है। जांच एजेंसियों की कार्रवाई और नेताओं की गिरफ्तारी ने सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी टकराव को और तेज कर दिया है।