कोरबा, 17 अप्रैल 2026। सक्ती जिले के वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे के बाद अब मामला पूरी तरह सियासी रंग ले चुका है। 20 मजदूरों की दर्दनाक मौत के बाद पुलिस द्वारा कंपनी चेयरमैन अनिल अग्रवाल समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज किए जाने के बावजूद पारदर्शिता को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने FIR को सार्वजनिक नहीं किए जाने पर सरकार को घेरते हुए सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि इतने बड़े हादसे में दर्ज FIR को छिपाना सरकार की नीयत पर सवाल खड़े करता है और जनता को यह जानने का अधिकार है कि किन धाराओं में किन लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ है। बघेल ने पुराने वेदांता हादसे का हवाला देते हुए भाजपा सरकार पर लीपापोती के आरोप भी लगाए।
वहीं उद्योग एवं श्रम मंत्री लखनलाल देवांगन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए पलटवार किया। उन्होंने कहा कि पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए FIR दर्ज कर दी है और प्रमुख नाम सामने आ चुके हैं। तंज कसते हुए मंत्री ने कहा—“अगर देखना है तो थाने जाकर पूरी लिस्ट देख लें।” उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब बड़े नाम सार्वजनिक हैं, तो अलग से FIR जारी करने की मांग का औचित्य क्या है।
दरअसल, पुलिस ने FIR को ‘सेंसिटिव’ श्रेणी में डालकर ऑनलाइन पोर्टल पर लॉक कर दिया है, जिससे बाकी आरोपियों और धाराओं की जानकारी सार्वजनिक नहीं हो पाई है। यही मुद्दा अब विपक्ष के लिए बड़ा राजनीतिक हथियार बन गया है।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, यह मामला अब केवल औद्योगिक हादसा नहीं रह गया, बल्कि “पारदर्शिता बनाम कार्रवाई” की बहस में बदल चुका है। एक ओर विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं सरकार जांच और त्वरित कार्रवाई का हवाला दे रही है। फिलहाल सरकार ने जांच के आदेश दे दिए हैं और जल्द गिरफ्तारी का भरोसा भी दिया है, लेकिन बड़ा सवाल बरकरार है—क्या इस बार दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी या मामला सियासत की भेंट चढ़ जाएगा?