रायपुर। छत्तीसगढ़ में सार्वजनिक स्थानों और भीड़भाड़ वाले परिसरों की सुरक्षा को सख्त बनाने के लिए राज्य सरकार नया कानून लाने जा रही है। विधानसभा के आगामी बजट सत्र में धर्मांतरण कानून के साथ-साथ “छत्तीसगढ़ लोक सुरक्षा उपाय प्रवर्तन विधेयक–2026” पेश किया जाएगा। प्रस्तावित कानून के तहत अब केवल सरकारी भवन ही नहीं, बल्कि निजी प्रतिष्ठान और बड़े रिहायशी भवन भी अनिवार्य सुरक्षा मानकों के दायरे में आएंगे। शहरीकरण और सार्वजनिक स्थलों पर बढ़ती आवाजाही के बीच अपराध की आशंकाओं को देखते हुए निगरानी आधारित सुरक्षा ढांचे को कानूनी रूप देने की तैयारी है।
क्या है कानून का उद्देश्य
इस विधेयक का मुख्य मकसद अपराध की रोकथाम, आपात स्थितियों में त्वरित पुलिस कार्रवाई और जांच प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। सरकार का मानना है कि व्यवस्थित निगरानी तंत्र से घटनाओं की जांच में पारदर्शिता और तेजी आएगी।
किन-किन पर लागू होगा कानून
विधेयक के प्रावधानों के अनुसार, ऐसे सभी प्रतिष्ठान जहां कम से कम पांच लोग कार्यरत हों, उन्हें सुरक्षा उपाय अपनाना अनिवार्य होगा। इनमें शामिल हैं:
- सरकारी भवन और कार्यालय
- सार्वजनिक संस्थान
- बस स्टैंड और रेलवे स्टेशन
- औद्योगिक व व्यावसायिक इकाइयां
- स्कूल, कॉलेज और अस्पताल
- सिनेमा हॉल और खेल परिसर
- अन्य भीड़भाड़ वाले स्थान
इसके अलावा ग्राउंड फ्लोर से ऊपर दो या उससे अधिक मंजिला रिहायशी भवन, जिनमें एक से अधिक परिवार या लॉजिंग यूनिट हों, उन्हें भी कानून के दायरे में लाया जाएगा।
अनिवार्य सुरक्षा प्रावधान
प्रस्तावित कानून के तहत निम्न सुरक्षा इंतजाम अनिवार्य किए जाएंगे:
- सभी प्रवेश और निकास द्वारों व कॉमन एरिया में CCTV कैमरे
- फिजिकल और तकनीकी एक्सेस कंट्रोल सिस्टम
- CCTV फुटेज कम से कम 30 दिनों तक सुरक्षित रखना
- आवश्यकता पड़ने पर फुटेज पुलिस को उपलब्ध कराना
- हर छह महीने में सुरक्षा उपायों की प्रमाणित रिपोर्ट जमा करना
समय-सीमा और निरीक्षण व्यवस्था
कानून लागू होने के बाद संबंधित इकाइयों को एक वर्ष के भीतर सभी सुरक्षा इंतजाम पूरे करने होंगे। जिन प्रतिष्ठानों के लिए लाइसेंस अनिवार्य है, उन्हें लाइसेंस नवीनीकरण से पहले नियमों का पालन सुनिश्चित करना होगा।
पुलिस को परिसरों का निरीक्षण करने का अधिकार दिया जाएगा, हालांकि इसके लिए पूर्व सूचना देना अनिवार्य रहेगा।
नियम तोड़ने पर सख्त कार्रवाई
यदि कोई संस्था नियमों का पालन नहीं करती है, तो पहले शो-कॉज नोटिस जारी किया जाएगा। इसके बाद भी सुधार नहीं होने पर पहले महीने 5 हजार रुपए और दूसरे महीने 10 हजार रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। दो महीने बाद भी अनुपालन नहीं होने की स्थिति में परिसर को सील करने और लाइसेंसिंग प्राधिकरण को कार्रवाई की रिपोर्ट भेजने का प्रावधान है। प्रभावित पक्ष को 30 दिनों के भीतर अपील करने का अधिकार भी दिया जाएगा।