छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मिली मंजूरी

छत्तीसगढ़ में हीरा खनन की तैयारी तेज: बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में बड़े व्यास की ड्रिलिंग को मिली मंजूरी

5 प्राकृतिक हीरे मिलने के बाद परियोजना अगले चरण में पहुंची, व्यावसायिक खनन का रास्ता हो सकता है साफ

रायपुर 27 जून। छत्तीसगढ़ की खनिज संपदा को नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। एनएमडीसी-सीएमडीसी लिमिटेड (एनसीएल) के निदेशक मंडल ने महासमुंद जिले के बलौदा-बेलमुंडी डायमंड ब्लॉक में परियोजना के अगले चरण के तहत लार्ज डायमीटर (Large Diameter) ड्रिलिंग को मंजूरी दे दी है। इस ड्रिलिंग के जरिए क्षेत्र में हीरे के वास्तविक भंडार का वैज्ञानिक आकलन किया जाएगा, जिससे भविष्य में व्यावसायिक हीरा खनन का मार्ग प्रशस्त हो सकेगा।

नई दिल्ली में आयोजित बोर्ड बैठक में परियोजना की प्रगति की समीक्षा करते हुए निर्देश दिए गए कि प्रॉस्पेक्टिंग लाइसेंस की अवधि के भीतर सभी तकनीकी कार्य समयबद्ध ढंग से पूरे किए जाएं। बड़े व्यास की ड्रिलिंग से किम्बरलाइट पाइप में मौजूद हीरा भंडार का सटीक मूल्यांकन होगा। इसके बाद विस्तृत व्यवहार्यता रिपोर्ट (फीजिबिलिटी रिपोर्ट) तैयार की जाएगी, जिसके आधार पर व्यावसायिक खदान विकसित करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा।

एनसीएल, भारत सरकार के उपक्रम एनएमडीसी लिमिटेड (51 प्रतिशत) और छत्तीसगढ़ मिनरल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (49 प्रतिशत) का संयुक्त उपक्रम है। अब तक यह कंपनी लौह अयस्क परियोजनाओं पर केंद्रित रही है, लेकिन बलौदा-बेलमुंडी क्षेत्र में प्राकृतिक हीरों की पुष्टि के बाद बहु-खनिज विकास की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। परियोजना के दौरान स्ट्रीम सेडिमेंट सैंपलिंग, भू-भौतिकीय सर्वेक्षण और लक्षित ड्रिलिंग के जरिए किम्बरलाइट पाइप की पहचान की गई। इसके बाद लगभग 200 टन बल्क सैंपल का परीक्षण एनएमडीसी के पन्ना डायमंड प्रोसेसिंग प्लांट में किया गया, जहां 1.22 कैरेट वजन के पांच प्राकृतिक हीरे प्राप्त हुए। इससे क्षेत्र में हीरा युक्त भू-संरचना की वैज्ञानिक पुष्टि हो चुकी है।

विशेषज्ञों का मानना है कि बोत्सवाना, दक्षिण अफ्रीका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया जैसे प्रमुख हीरा उत्पादक देशों में भी इसी तरह की शुरुआती सफलता बड़े व्यावसायिक भंडार का आधार बनी थी। ऐसे में बलौदा-बेलमुंडी परियोजना को छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देश की महत्वपूर्ण खनिज परियोजनाओं में शामिल माना जा रहा है।

बैठक में बैलाडीला डिपॉजिट-4 और डिपॉजिट-13 सहित राज्य की अन्य लौह अयस्क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। साथ ही सभी परियोजनाओं में पर्यावरण संरक्षण, वैज्ञानिक खनन, जल संरक्षण, अपशिष्ट प्रबंधन और स्थानीय समुदायों के सामाजिक-आर्थिक विकास को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर जोर दिया गया। छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने कहा कि बलौदा-बेलमुंडी की हीरा परियोजना राज्य को देश के प्रमुख हीरा उत्पादक राज्यों की श्रेणी में स्थापित करने की दिशा में ऐतिहासिक साबित हो सकती है।

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