YC न्यूज़ डेस्क।बस्तर की समृद्ध जनजातीय संस्कृति, कला, लोकपरंपराओं और विरासत के संरक्षण व संवर्धन के उद्देश्य से आयोजित होने वाला ‘बस्तर पंडुम-2026’ इस बार और अधिक भव्य रूप में सामने आएगा। कार्यक्रम का आयोजन 10 जनवरी से 5 फरवरी 2026 तक किया जाएगा। इस प्रतिष्ठित आयोजन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की मौजूदगी प्रस्तावित है। साथ ही भारत के विभिन्न देशों में कार्यरत भारतीय राजदूतों को भी बस्तर आमंत्रित किए जाने की तैयारी है। इससे पहले 2 जनवरी को मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने दंतेवाड़ा में मां दंतेश्वरी के पावन प्रांगण से बस्तर पंडुम-2026 का लोगो और थीम गीत लॉन्च किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि बस्तर पंडुम सिर्फ एक उत्सव नहीं, बल्कि बस्तर की आत्मा और सांस्कृतिक पहचान का सशक्त मंच है।
तीन चरणों में होगा आयोजन
बस्तर पंडुम-2026 का आयोजन तीन चरणों में किया जाएगा।
10 से 20 जनवरी: जनपद स्तरीय कार्यक्रम
24 से 29 जनवरी: जिला स्तरीय कार्यक्रम
2 से 6 फरवरी: संभाग स्तरीय कार्यक्रम
संभाग स्तरीय कार्यक्रम में ही राष्ट्रपति और केंद्रीय गृहमंत्री की सहभागिता प्रस्तावित है। इस दौरान देश-विदेश से आए अतिथि बस्तर की जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और जीवनशैली से रूबरू होंगे।
विधाओं की संख्या 7 से बढ़कर 12–
इस वर्ष बस्तर पंडुम में प्रतियोगिता और प्रदर्शन की विधाओं की संख्या 7 से बढ़ाकर 12 की जा रही है। इनमें जनजातीय नृत्य, गीत, नाट्य, वाद्ययंत्र, वेशभूषा एवं आभूषण, पूजा-पद्धति के साथ-साथ शिल्प, चित्रकला, पारंपरिक व्यंजन और पेय पदार्थ, आंचलिक साहित्य तथा वन-औषधि को भी शामिल किया गया है। अतिथियों को बस्तर के देसी फूड्स और पारंपरिक पेय का स्वाद चखने का अवसर भी मिलेगा।
CM बोले— बस्तर पंडुम है बस्तर की आत्मा–
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर पंडुम हमारी समृद्ध जनजातीय संस्कृति, लोक-परंपराओं, कला और विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम है। बस्तर अब केवल संस्कृति का केंद्र नहीं, बल्कि शांति, समृद्धि और पर्यटन के जरिए विकास का प्रतीक भी बन रहा है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष बस्तर पंडुम के समापन अवसर पर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की उपस्थिति ने आयोजन को राष्ट्रीय पहचान दिलाई। इस बार राष्ट्रपति, केंद्रीय गृहमंत्री, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री और विभिन्न देशों में तैनात भारतीय राजदूतों की मौजूदगी से बस्तर पंडुम को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर पहचान मिलेगी। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि बस्तर पंडुम-2026 बस्तर की सांस्कृतिक धरोहर को देश-दुनिया तक पहुंचाने का मजबूत मंच साबित होगा और बस्तरवासियों के उत्साह को नई ऊंचाई देगा।