मिड डे मिल के लिए शिक्षकों पर दबाव अनुचित, 15वें वित्त से हो भोजन व्यवस्था — हुलेश चंद्राकर

रायपुर। छत्तीसगढ़ में मध्याह्न भोजन (MDM) योजना के संचालन को लेकर शिक्षा विभाग और शिक्षकों के बीच तनाव की स्थिति गहराती जा रही है। रसोइयों की हड़ताल के बाद उत्पन्न अव्यवस्था का बोझ शिक्षकों पर डाले जाने के विरोध में छत्तीसगढ़ सहायक शिक्षक फेडरेशन ने सरकार और शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
फेडरेशन के प्रांतीय प्रवक्ता हुलेश चंद्राकर ने स्पष्ट कहा कि MDM संचालन के लिए शिक्षकों पर दबाव बनाना न केवल अनुचित है, बल्कि इससे सरकार और विभाग की छवि भी प्रभावित हो रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि “व्यवस्था” के नाम पर तानाशाही रवैया अपनाया जा रहा है और रसोइयों की हड़ताल के बाद अधिकारी अपनी जिम्मेदारी शिक्षकों पर थोप रहे हैं।

हुलेश चंद्राकर ने बताया कि कई जिलों में प्रधान पाठकों, शिक्षकों एवं स्व-सहायता समूहों पर दबाव बनाकर भोजन व्यवस्था कराने के निर्देश दिए जा रहे हैं। कहीं वेतन रोकने तो कहीं वेतन कटौती की धमकियां दी जा रही हैं, जिसका फेडरेशन पुरजोर विरोध करता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि MDM एक कल्याणकारी योजना है, लेकिन इसका संचालन शिक्षकों की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं हो सकती।
फेडरेशन ने सुझाव दिया कि ऐसी स्थिति में पंचायतों को निर्देशित कर 15वें वित्त आयोग की राशि से अस्थायी रूप से रसोइयों या मजदूरों की व्यवस्था की जाए, ताकि न तो बच्चों का भोजन प्रभावित हो और न ही शिक्षकों पर आर्थिक व मानसिक दबाव पड़े। धमतरी जिले का उदाहरण देते हुए फेडरेशन ने कहा कि जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा बीईओ को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने के बाद दबाव की श्रृंखला शुरू हुई और इसका सीधा असर शिक्षकों पर पड़ा। बैठकें लेकर सूची तैयार की जा रही है और अप्रत्यक्ष रूप से वेतन रोकने का भय दिखाया जा रहा है, जो शिक्षकों के सम्मान और अधिकारों के खिलाफ है।

जिला अध्यक्ष दौलत ध्रुव, ब्लॉक अध्यक्ष ममता प्रजापति, लुकेश साहू, टेमन साहू, तेजलाल साहू सहित अन्य पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि शिक्षकों के वेतन से जुड़ी किसी भी प्रकार की कार्रवाई की गई, तो ब्लॉक स्तर पर घेराव और आंदोलन किया जाएगा। प्रदेश अध्यक्ष रविंद्र राठौर ने भी कहा कि शिक्षक समाधान चाहते हैं, धमकी नहीं। प्रदेश पदाधिकारी कौशल अवस्थी, सिराज बख्श, बसंत कौशिक, अश्वनी कुर्रे, मनीष मिश्रा, संकीर्तन नंद सहित अनेक शिक्षकों ने प्रशासन से व्यावहारिक और संवेदनशील समाधान निकालने की मांग की है। फेडरेशन ने सरकार से आग्रह किया है कि कलेक्टरों को स्पष्ट निर्देश जारी कर पंचायत के 15वें वित्त से MDM की वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि शिक्षा व्यवस्था प्रभावित न हो और शिक्षकों का मनोबल बना रहे।

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