बिलासपुर – गुरु घासीदास सेंट्रल यूनिवर्सिटी, बिलासपुर में छात्रों को कथित रूप से जबरन नमाज पढ़ाने के आरोप में घिरे प्रोफेसर दिलीप झा और अन्य शिक्षकों को छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी है। चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की डिवीजन बेंच ने उनकी याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
आरोपियों ने इस मामले में दर्ज एफआईआर को राजनीति से प्रेरित बताते हुए उसे रद्द करने की मांग की थी। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि एफआईआर रद्द करना दुर्लभतम मामलों में ही उचित होता है और वर्तमान केस में जांच जारी रहने दी जानी चाहिए।
क्या है पूरा मामला
26 मार्च से 1 अप्रैल 2024 के बीच कोटा क्षेत्र के शिवतराई में विश्वविद्यालय की NSS इकाई द्वारा एक शिविर आयोजित किया गया था। आरोप है कि ईद के दिन हिंदू छात्रों को जबरन नमाज पढ़ने के लिए मजबूर किया गया और उनका ‘ब्रेनवॉश’ किया गया। इस संबंध में छात्र आस्तिक साहू, आदर्श चतुर्वेदी और नवीन कुमार की शिकायत पर कोनी थाना पुलिस ने FIR दर्ज की थी।
एफआईआर में NSS कोऑर्डिनेटर दिलीप झा, मधुलिका सिंह, सूर्यभान सिंह, डॉ. ज्योति वर्मा, प्रशांत वैष्णव, बसंत कुमार और डॉ. नीरज कुमारी को आरोपी बनाया गया। घटना के बाद यूनिवर्सिटी में राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने जमकर विरोध प्रदर्शन किया और कुलपति को हटाने की मांग की गई।
हाईकोर्ट में उठे तर्क
प्रोफेसरों की ओर से दाखिल याचिका में दावा किया गया कि मामला राजनीति से प्रेरित है और एफआईआर साजिशन 14 दिन की देरी से दर्ज की गई। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 150 छात्रों में से केवल तीन ने शिकायत की है, जबकि बाकी छात्रों और मुस्लिम प्रतिभागियों ने आरोपों को खारिज किया है।
राज्य सरकार की दलीलें और कोर्ट का फैसला
राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि आरोप गंभीर हैं और गवाहों ने शिकायत की पुष्टि की है। सरकार ने कोर्ट से जांच जारी रखने की अनुमति मांगी। कोर्ट ने महाराष्ट्र राज्य बनाम निहारिका इंफ्रास्ट्रक्चर केस का हवाला देते हुए कहा कि FIR रद्द करना तभी संभव है जब मामला पूरी तरह से झूठा या दुर्भावनापूर्ण प्रतीत हो।
न्यायालय ने कहा कि इस चरण पर आरोपों की सत्यता पर कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, और पुलिस को स्वतंत्र जांच करने दी जानी चाहिए। इसी आधार पर कोर्ट ने सभी याचिकाएं खारिज कर दीं।