रायपुर/बिलासपुर | प्रदेश में ई-चालान सिस्टम को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। बुलेट बाइक पर सीट बेल्ट न लगाने, बिना गलती ओवरस्पीडिंग, कैमरा एंगल की गड़बड़ी, नंबर प्लेट की गलत रीडिंग और सर्वर एरर जैसे मामलों में बड़ी संख्या में गलत चालान जारी होने की शिकायतें सामने आई हैं। इससे वाहन चालकों और ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों में नाराजगी बढ़ रही है। वाहन चालकों का कहना है कि बिना किसी पूर्व सूचना या सुनवाई का अवसर दिए सीधे ऑनलाइन चालान जारी कर दिए जाते हैं। मोबाइल पर मैसेज आने के बाद मजबूरी में जुर्माना भरना पड़ता है। अकेले बिलासपुर जिले में पिछले दो वर्षों में 2 लाख 687 ई-चालान जारी किए गए, जिनसे 10 करोड़ 79 लाख 23 हजार 27 रुपए की वसूली हुई है। वहीं वर्ष 2024-25 में 23,357 लोगों ने चालान सुधार के लिए आवेदन दिया है।
अजीबोगरीब मामले सामने आए
कई मामलों में तकनीकी खामियों ने सिस्टम की सटीकता पर सवाल खड़े किए हैं। 23 सितंबर 2023 को गोलबाजार निवासी चंद्रशेखर सिंह राजपूत को ओडिशा के सुंदरगढ़ से 1000 रुपए का चालान मिला, जिसमें उन पर सीट बेल्ट न पहनने का आरोप था, जबकि उनका वाहन बुलेट मोटरसाइकिल था। इसी तरह संदीप कुमार मिश्रा पर खतरनाक ड्राइविंग का आरोप लगाते हुए 2000 रुपए का चालान किया गया, जबकि उन्होंने आरोपों से इनकार किया। ट्रक ड्राइवर अशोक कुमार को ओवरस्पीडिंग का चालान मिला, जबकि जीपीएस रिकॉर्ड के अनुसार वाहन निर्धारित गति सीमा में था। ऐसे कई मामलों में वाहन चालकों को ट्रैफिक कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, लेकिन सुनवाई की कोई तय समय सीमा नहीं है।
कैमरा और मार्किंग की समस्या
राजधानी रायपुर में रोजाना करीब 5000 ई-चालान जारी किए जा रहे हैं, जिनमें लगभग 30 प्रतिशत चालान स्टॉप लाइन उल्लंघन के हैं। जबकि शहर के अधिकांश सिग्नलों पर स्टॉप लाइन और जेब्रा क्रॉसिंग की मार्किंग धुंधली या पूरी तरह मिट चुकी है। जयस्तंभ चौक, शास्त्री चौक, शारदा चौक और आमापारा चौक जैसे प्रमुख स्थानों पर वाहन चालकों को स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, जिससे वे अनजाने में लाइन पार कर देते हैं और कैमरों के आधार पर चालान काट दिया जाता है।
इंटरस्टेट ऑपरेटर और ठगी का खतरा
ट्रांसपोर्ट ऑपरेटरों का कहना है कि अलग-अलग राज्यों में अलग नियम और जुर्माने के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं ई-चालान के नाम पर फर्जी लिंक और वेबसाइट्स के जरिए ठगी के मामले भी सामने आए हैं, जहां लिंक क्लिक करते ही बैंक खातों से रकम निकलने की शिकायतें मिली हैं।
विशेषज्ञों की राय
रिटायर्ड आईपीएस जयंत थोरात का कहना है कि ई-चालान सिस्टम पारदर्शिता तो लाता है, लेकिन इसकी प्रक्रिया और सटीकता में सुधार जरूरी है। चालान जारी करने से पहले नोटिस और सुनवाई का अवसर मिलना चाहिए।
हाईकोर्ट अधिवक्ता विनय दुबे ने कहा कि बिना सुनवाई के दंड देना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत के खिलाफ है और इसके लिए एक मजबूत ऑनलाइन अपील सिस्टम होना चाहिए। वहीं एसएसपी रजनेश सिंह ने कहा कि ई-चालान से नियमों का पालन बढ़ा है और भ्रष्टाचार में कमी आई है। तकनीकी खामियों को दूर करने की दिशा में लगातार सुधार किया जा रहा है। ई-चालान सिस्टम को लेकर बढ़ती शिकायतों के बीच अब जरूरत इस बात की महसूस की जा रही है कि तकनीकी सटीकता, पारदर्शिता और न्यायसंगत प्रक्रिया को और मजबूत किया जाए, ताकि आम लोगों का भरोसा इस व्यवस्था पर बना रहे।