रायपुर, 2 अप्रैल 2026। राजधानी रायपुर के मौदहापारा थाना क्षेत्र में सामने आए 39 लाख रुपये के ठगी मामले ने पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के सुशासन के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले के मुख्य आरोपी मोहम्मद इमरान नवाब की अग्रिम जमानत याचिका कोर्ट द्वारा खारिज किए जाने के बावजूद अब तक उसकी गिरफ्तारी नहीं हो पाई है, जिससे पुलिस की कार्यप्रणाली पर संदेह गहराता जा रहा है। पीड़ित मोहम्मद शाहनवाज के अनुसार, उन्होंने आरोपी के खिलाफ ठगी के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत किए थे, बावजूद इसके मौदहापारा पुलिस ने FIR दर्ज करने में करीब 135 दिनों की देरी की। इस देरी ने आरोपी को फरार होने और साक्ष्य प्रभावित करने का पर्याप्त मौका दे दिया।
इतना ही नहीं, पीड़ित ने पुलिस अधिकारियों पर दुर्व्यवहार, गलत भाषा के प्रयोग और दबाव बनाने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए हैं। पीड़ित का यह भी कहना है कि उनके पिता का हाल ही में कैंसर के कारण निधन हुआ है, जिसके चलते वे मानसिक रूप से पहले से ही कमजोर स्थिति में हैं, फिर भी उन्हें न्याय के बजाय प्रताड़ना का सामना करना पड़ रहा है।
मामले में आरोपी इमरान नवाब ने गिरफ्तारी से बचने के लिए अग्रिम जमानत याचिका दायर की थी, जिसे IX अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश (कोर्ट क्रमांक 86) ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 2 अप्रैल 2026 को खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद अब आरोपी की गिरफ्तारी की उम्मीद बढ़ गई है, लेकिन अब तक पुलिस की निष्क्रियता चिंता का विषय बनी हुई है।इस पूरे घटनाक्रम ने न केवल पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व वाली सरकार के सुशासन के दावों की भी पोल खोल दी है। राजधानी में ही यदि पीड़ित को समय पर न्याय नहीं मिल पा रहा है, तो यह कानून व्यवस्था और प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर चिंता का विषय है।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जमानत खारिज होने के बाद पुलिस कितनी तत्परता दिखाती है और क्या पीड़ित को उसकी गाढ़ी कमाई वापस दिला पाती है या नहीं। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक लापरवाही और राजनीतिक जवाबदेही दोनों की परीक्षा बन चुका है।