भिलाई। बाल अधिकारों के संरक्षण और संवर्धन को मजबूत करने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में एक नई पहल शुरू की जा रही है। नए शैक्षणिक सत्र से Shri Shankaracharya Professional University में बाल संरक्षण पर आधारित एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा पाठ्यक्रम ‘रक्षक’ प्रारंभ किया जाएगा। यह पाठ्यक्रम Chhattisgarh State Commission for Protection of Child Rights के मार्गदर्शन में प्रदेश के छह विश्वविद्यालयों में शुरू किया जा रहा है। दुर्ग संभाग में यह अवसर केवल इसी विश्वविद्यालय को मिला है। इस संबंध में विश्वविद्यालय में आयोजित बैठक में आयोग की अध्यक्ष Varnika Sharma और सचिव Prateek Khare ने पाठ्यक्रम की तैयारियों की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।
बैठक में विश्वविद्यालय के कुलाधिपति I. P. Mishra ने ‘रक्षक’ पाठ्यक्रम को बाल संरक्षण के क्षेत्र में एक सार्थक और ठोस पहल बताया। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में अधिकारों के संरक्षण के साथ-साथ उनके प्रति जागरूकता भी बेहद जरूरी है। यह पाठ्यक्रम सामाजिक सरोकारों से जुड़ा होने के साथ युवाओं को रोजगार के नए अवसर भी प्रदान करेगा।
आयोग की अध्यक्ष वर्णिका शर्मा ने बताया कि यह एक वर्षीय पीजी डिप्लोमा दो सेमेस्टर में पूरा होगा। वहीं सचिव प्रतीक खरे ने जानकारी दी कि पाठ्यक्रम की संरचना सामाजिक कार्य, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान और विधि जैसे विषयों को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। उन्होंने कहा कि बाल संरक्षण केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी नहीं बल्कि समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है। विश्वविद्यालय की कुलसचिव Dr. Smita Selat ने बताया कि नए सत्र से पाठ्यक्रम शुरू करने के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की जा रही हैं और प्रारंभिक रूप से इसमें 20 सीटें निर्धारित की गई हैं। बैठक में कुलपति Dr. Sandeep Srivastava, Dr. Sneh Kumar Meshram तथा डायरेक्टर (विकास) Dr. Sushil Chandra Tiwari सहित अन्य अधिकारी भी मौजूद रहे।