जल-जंगल के ऐतिहासिक संघर्षों को समर्पित ‘सत्याग्रह’ पुस्तक का विमोचन, विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा— नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ेगी यह कृति

स्वर्गीय आशीष सिंह की पुस्तक में छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता आंदोलन और जल-जंगल के सत्याग्रह का विस्तृत दस्तावेज
रायपुर, 3 अगस्त 2026। विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने रविवार शाम शंकर नगर स्थित अपने निवास कार्यालय में हरि ठाकुर स्मारक संस्थान, रायपुर द्वारा आयोजित समारोह में साहित्यकार एवं पत्रकार स्वर्गीय आशीष सिंह की पुस्तक ‘सत्याग्रह’ का विमोचन किया। यह पुस्तक छत्तीसगढ़ के जल-जंगल से जुड़े ऐतिहासिक संघर्षों और स्वतंत्रता आंदोलन में जनभागीदारी को समर्पित है। कार्यक्रम की अध्यक्षता छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा ने की। इस अवसर पर राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा, पूर्व सांसद चुन्नीलाल साहू, साहित्यकार, स्वर्गीय आशीष सिंह के सुपुत्र उपमन्यु सिंह एवं अभिमन्यु सिंह सहित अनेक साहित्यकार और गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने कहा कि ‘सत्याग्रह’ पुस्तक छत्तीसगढ़ के स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों द्वारा जल-जंगल के अधिकारों के लिए किए गए ऐतिहासिक संघर्षों का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। उन्होंने कहा कि पुस्तक में ब्रिटिश शासनकाल के दौरान हुए आंदोलनों का प्रामाणिक वर्णन है, जिसमें बस्तर से लेकर राजनांदगांव और धमतरी के प्रसिद्ध कंडेल नहर सत्याग्रह तक की घटनाओं को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1920 में बाबू छोटेलाल श्रीवास्तव के आग्रह पर महात्मा गांधी धमतरी पहुंचे थे। साथ ही राजनांदगांव के शहीद रामाधीन गोंड, त्यागमूर्ति स्वर्गीय प्यारेलाल सिंह तथा स्वर्गीय हरि ठाकुर जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान का भी उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।

राज्य नीति आयोग के उपाध्यक्ष गणेश शंकर मिश्रा ने कहा कि यह पुस्तक जल-जंगल के संघर्षों के शताब्दी वर्ष के अवसर पर प्रकाशित होना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि स्वर्गीय आशीष सिंह ने धमतरी के कंडेल नहर सत्याग्रह, नत्थूजी जगताप, नारायण राव मेघावाले, शहीद रामाधीन गोंड और पंडित सुंदरलाल शर्मा के योगदान को शोधपरक तरीके से प्रस्तुत किया है। उन्होंने पुस्तक के प्रकाशन के लिए हरि ठाकुर स्मारक संस्थान को बधाई दी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राजभाषा आयोग के अध्यक्ष प्रभात मिश्रा, साहित्य अकादमी के अध्यक्ष शशांक शर्मा तथा साहित्यकार वीरेन्द्र बहादुर ने भी पुस्तक की ऐतिहासिक और साहित्यिक महत्ता पर अपने विचार व्यक्त किए।

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