रायपुर । छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित नान घोटाले में आरोपी और रिटायर्ड IAS आलोक शुक्ला ने रायपुर स्थित प्रवर्तन निदेशालय (ED) की विशेष अदालत में तीसरी बार सरेंडर किया। यह कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संभव हो सकी। सरेंडर प्रक्रिया के दौरान ED के अधिकारी मौजूद रहे, वहीं सुरक्षा की दृष्टि से CRPF जवानों की विशेष तैनाती की गई थी। अदालत ने शुक्ला का सरेंडर आवेदन स्वीकार कर लिया और इसके बाद ED ने 14 दिन की कस्टोडियल रिमांड की मांग रखी है, ताकि उनसे गहन पूछताछ की जा सके। माना जा रहा है कि अदालत के आदेश मिलते ही ED उन्हें हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू करेगी।
गौरतलब है कि आलोक शुक्ला ने बीते तीन दिनों में लगातार सरेंडर का प्रयास किया था। 18 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट का आदेश अपलोड न होने के कारण अदालत ने सरेंडर स्वीकार नहीं किया था। 19 सितंबर को ED के वकील केस डायरी लेकर नहीं पहुँचे, जिसके चलते प्रक्रिया अधूरी रह गई। अंततः 21 सितंबर को सभी औपचारिकताओं के बाद सरेंडर स्वीकार कर लिया गया।
नान घोटाला छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा खाद्यान्न वितरण घोटाला माना जाता है। आरोप है कि नागरिक आपूर्ति निगम (नान) में खाद्यान्न वितरण के नाम पर करोड़ों रुपये का भ्रष्टाचार हुआ। इस मामले में कई अधिकारी और कारोबारी आरोपी हैं तथा जांच ED और EOW कर रही है। ED का कहना है कि शुक्ला से पूछताछ में घोटाले के पैसों के लेन-देन, अन्य अधिकारियों से संबंध और कथित साजिश के बारे में महत्वपूर्ण खुलासे हो सकते हैं। अदालत से रिमांड की अवधि तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि उन्हें कितने दिन तक ED की हिरासत में रखा जाएगा। इस सरेंडर को नान घोटाले की जांच में अहम प्रगति माना जा रहा है। फिलहाल राज्यभर की निगाहें रायपुर की ED कोर्ट पर टिकी हैं।