बीजापुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा विभाग से जुड़ा एक बड़ा घोटाला सामने आया है। बीजापुर जिले में RMSA (राष्ट्रीय माध्यमिक शिक्षा अभियान) योजना के तहत पोटा-केबिन हॉस्टलों के लिए सामग्री सप्लाई में भारी वित्तीय अनियमितताएँ उजागर हुई हैं। जांच में पता चला है कि बिना किसी निविदा प्रक्रिया के ही लगभग 1.20 करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया गया। इस खुलासे से प्रशासनिक और शैक्षणिक हलकों में हड़कंप मच गया है।
जांच में सामने आई गड़बड़ी
बीजापुर कलेक्टर द्वारा एसडीएम को सौंपी गई जांच में पाया गया कि सामग्री सप्लाई के लिए न तो टेंडर जारी हुआ और न ही पारदर्शिता का पालन किया गया। इसके बावजूद लाखों रुपये के बिल पास कर भुगतान कर दिया गया। जांच रिपोर्ट ने स्पष्ट कर दिया कि यह कार्यवाही नियम विरुद्ध है और इसमें गंभीर लापरवाही व मिलीभगत की आशंका है।
कलेक्टर की सख्त कार्रवाई
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद बीजापुर कलेक्टर ने 24 पोटा-केबिन हॉस्टल अधीक्षकों को तत्काल प्रभाव से पद से हटा दिया। कलेक्टर ने कहा कि शिक्षा और बच्चों के लिए चलाई जा रही योजनाओं में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी बर्दाश्त नहीं की जाएगी। आगे विभागीय और कानूनी जांच के बाद दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अब होगी गहन जांच
प्रशासन अब यह पता लगाने में जुटा है कि किन-किन हॉस्टलों से कितना भुगतान हुआ और किन अधिकारियों-कर्मचारियों की संलिप्तता रही। विभाग से सभी बिल, भुगतान विवरण और सामग्री सप्लाई की सूची मांगी गई है। जांच के दायरे में कई और नाम आने की संभावना जताई जा रही है। जिला प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि दोषियों पर FIR दर्ज कर राशि की रिकवरी भी की जा सकती है।
शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
यह घोटाला शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। पोटा-केबिन हॉस्टल नक्सल प्रभावित क्षेत्रों के बच्चों को सुरक्षित वातावरण में शिक्षा देने के लिए बनाए गए थे, लेकिन करोड़ों की गड़बड़ी ने इस योजना के उद्देश्य को ही धूमिल कर दिया है।